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FIR कैसे करें: पूरी प्रक्रिया, ज़ीरो FIR और ई-FIR

पुलिस शिकायत और FIR के बारे में नागरिकों के लिए सरल भाषा — शैक्षिक मार्गदर्शन; औपचारिक सलाह या परिणाम की गारंटी नहीं।

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सीधा जवाब

FIR दर्ज कराने के लिए किसी भी थाने में जाएँ, चाहे वह आपके इलाके का न हो (ज़ीरो FIR), और घटना बोलकर या लिखकर बताएँ। BNSS धारा 173 के तहत संज्ञेय अपराध में पुलिस को FIR दर्ज करनी ही होगी, आपको पढ़कर सुनानी होगी, हस्ताक्षर लेने होंगे और मुफ़्त कॉपी देनी होगी। आप राज्य पुलिस पोर्टल पर ऑनलाइन ई-FIR भी कर सकते हैं, फिर 3 दिन के भीतर थाने में हस्ताक्षर करें। पुलिस मना करे तो लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक (SP) को भेजें (धारा 173(4)) और फिर मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करें (धारा 175(3))। आपात स्थिति में 112 डायल करें; साइबर ठगी के लिए 1930।

टीम अधिवक्ता · अपडेट 2026-10-26

FIR: अब क्या करें? 5 सवाल

    क्या अभी कोई ख़तरा है या किसी को चोट लगी है?

    FIR कैसे करें — क्रम से

    1. पहले सुरक्षा और तुरंत मदद

      ख़तरा या चोट: 112 डायल करें और इलाज कराएँ; अस्पताल का रिकॉर्ड सबूत है। ऑनलाइन पैसे की ठगी: पहले घंटे में 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।

    2. तथ्य लिख लें

      क्या हुआ, तारीख़, समय, जगह, किसने किया या उसका हुलिया, गवाह, और क्या नुकसान या चोट हुई। सरल और सच लिखें; बढ़ा-चढ़ाकर नहीं।

    3. किसी भी थाने में जाएँ

      नज़दीकी थाना ठीक है। अपराध कहीं और हुआ हो तो ज़ीरो FIR माँगें; थाना इसे दर्ज कर सही थाने को भेजेगा।

    4. सूचना दें

      ड्यूटी अधिकारी को बोलकर बताएँ या लिखित शिकायत दो प्रतियों में दें। दूसरी प्रति पर पावती की मुहर लगवाएँ। यौन अपराध की शिकायत करने वाली महिला का बयान महिला अधिकारी दर्ज करे, यह अधिकार है।

    5. जाँचें, हस्ताक्षर करें, मुफ़्त कॉपी लें

      FIR आपको पढ़कर सुनाई जानी चाहिए। हस्ताक्षर से पहले नाम, तारीख़ और तथ्य जाँचें। मुफ़्त कॉपी लें और FIR नंबर, तारीख़ और धाराएँ नोट करें।

    6. या ऑनलाइन ई-FIR करें

      राज्य पुलिस के नागरिक पोर्टल या ऐप का उपयोग करें। वाहन और फ़ोन चोरी आमतौर पर ऑनलाइन ली जाती है। 3 दिन के भीतर थाने में हस्ताक्षर करने पर ई-FIR नियमित FIR बन जाती है।

    7. जाँच पर नज़र रखें

      राज्य पोर्टल से FIR डाउनलोड करें। पुलिस को 90 दिन में जाँच की प्रगति बतानी होती है (BNSS धारा 193(3))। सभी पावती और रसीदें सँभालकर रखें।

    ज़रूरी दस्तावेज़

    • आपका पहचान पत्र (आधार, वोटर आईडी या कोई फ़ोटो आईडी)
    • लिखित शिकायत, दो प्रतियाँ, हस्ताक्षर और तारीख़ सहित
    • सबूत: फ़ोटो, वीडियो, स्क्रीनशॉट, कॉल रिकॉर्ड
    • चोट हो तो मेडिकल रिपोर्ट
    • चोरी के सामान के बिल, RC या IMEI
    • ठगी में बैंक स्टेटमेंट और ट्रांज़ैक्शन ID
    • गवाहों के नाम और फ़ोन नंबर

    ख़र्च और समय

    FIR का ख़र्च
    कुछ नहीं। FIR दर्ज कराना और उसकी कॉपी दोनों मुफ़्त; कोई पैसा नहीं ले सकता
    कब दर्ज होनी चाहिए
    संज्ञेय अपराध में तुरंत (ललिता कुमारी, 2013)
    प्रारंभिक जाँच
    केवल 3–7 साल सज़ा वाले अपराधों में, 14 दिन के भीतर (धारा 173(3))
    ई-FIR पर हस्ताक्षर
    3 दिन के भीतर थाने में
    जाँच की जानकारी
    90 दिन के भीतर (धारा 193(3))

    कानून और स्रोत

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    शिकायत और FIR

    शिकायत में घटना बताई जाती है। संज्ञेय अपराध में FIR जाँच शुरू कर सकती है। राज्य और तथ्यों के अनुसार प्रक्रिया भिन्न हो सकती है।

    क्या लिखकर रखें

    तारीख, स्थान, नाम, चोट/नुकसान, मेडिकल या नोटिस की प्रति। दस्तावेज़ न बदलें। पासवर्ड या OTP किसी साइट पर न डालें।

    दर्ज न होने पर

    कुछ स्थितियों में उच्चतर उपचार उपलब्ध हो सकते हैं। स्वतंत्र अधिवक्ता सामान्य विकल्प समझा सकते हैं — अधिवक्ता मंच कोई फाइलिंग या नतीजे की गारंटी नहीं देता।

    आपात स्थिति

    तुरंत खतरे में स्थानीय आपात सेवाएँ कॉल करें। ऑनलाइन फ़ॉर्म आपात हॉटलाइन नहीं है।

    Ask पर प्रश्न

    आपराधिक क्षेत्र चुनकर संक्षिप्त तथ्य लिखें। सामान्य मार्गदर्शन मात्र — न्यायालय बचाव नहीं।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    क्या किसी भी थाने में FIR हो सकती है?
    हाँ। BNSS धारा 173 के तहत संज्ञेय अपराध में थाने को ज़ीरो FIR दर्ज करनी होगी, भले अपराध उसके इलाके से बाहर हुआ हो, फिर वह सही थाने को भेजेगा।
    ऑनलाइन FIR कैसे करें?
    अपने राज्य पुलिस के नागरिक पोर्टल या ऐप पर ई-FIR या ऑनलाइन शिकायत चुनें। 3 दिन के भीतर थाने जाकर हस्ताक्षर करें ताकि FIR औपचारिक रूप से दर्ज हो। साइबर ठगी के लिए cybercrime.gov.in या 1930।
    पुलिस FIR लिखने से मना करे तो क्या करें?
    लिखित शिकायत पर पावती की मुहर लगवाएँ या डाक/ईमेल से भेजें। फिर धारा 173(4) में SP को भेजें। फिर भी कुछ न हो तो हलफ़नामे सहित धारा 175(3) में न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करें।
    क्या FIR के लिए कोई फ़ीस लगती है?
    नहीं। FIR दर्ज कराना मुफ़्त है और उसकी कॉपी भी मुफ़्त मिलती है। FIR के लिए पैसे माँगने वाले की शिकायत SP या भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में करें।
    FIR और NCR में क्या अंतर है?
    FIR संज्ञेय अपराधों के लिए है, जैसे चोरी या चोट पहुँचाने वाली मारपीट; पुलिस बिना कोर्ट की अनुमति जाँच कर सकती है। NCR असंज्ञेय मामले में दर्ज होती है; जाँच के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश चाहिए (धारा 174)।
    क्या FIR की कोई समय सीमा है?
    कोई तय समय सीमा नहीं, पर जितनी जल्दी हो सके दर्ज कराएँ। देरी का कारण FIR में ही लिखें, क्योंकि बिना कारण की देरी केस को कमज़ोर कर सकती है।

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