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काम पर दुर्घटना में चोट या मृत्यु? कर्मचारी मुआवज़ा — सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (पुराना कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923) में कौन शामिल, आने-जाने में दुर्घटना, कितना मुआवज़ा, दावे की 2 साल की सीमा, देरी पर ब्याज और जुर्माना, ESI वाले कर्मचारी और ड्यूटी पर सड़क दुर्घटना (2026)

कार्यस्थल दुर्घटना — फ़ैक्ट्री, निर्माण स्थल, दुकान, परिवहन या दफ़्तर की नौकरी — या व्यावसायिक बीमारी के बाद मज़दूरों और परिवारों के लिए सरल गाइड: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अध्याय VII (21 नवंबर 2025 से लागू, जिसने कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 की जगह ली) में नियोक्ता की ज़िम्मेदारी, मृत्यु और विकलांगता में मुआवज़ा कैसे गिना जाता है, इलाज और अंतिम संस्कार का ख़र्च, सूचना और 2 साल में दावा, सक्षम प्राधिकारी, देरी पर ब्याज और जुर्माना, और कब ESIC या मोटर दुर्घटना दावा लागू होता है। केवल शैक्षिक जानकारी — कानूनी सलाह नहीं। अधिवक्ता कोई दावा दाखिल नहीं करता और नियोक्ता से संपर्क नहीं करता।

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दुर्घटना के बाद पहले कदम

इलाज कराएँ और ध्यान रखें कि अस्पताल चोट कैसे लगी यह दर्ज करे (गंभीर चोट में आम तौर पर MLC बनती है)। जल्द से जल्द नियोक्ता को लिखित सूचना दें — घायल का नाम, पता, चोट का कारण और तारीख़ (धारा 82(3)); सूचना रजिस्टर्ड डाक, इलेक्ट्रॉनिक तरीके से या नियोक्ता की नोटिस-बुक में दी जा सकती है। नौकरी और वेतन दिखाने वाले पहचान पत्र, सैलरी स्लिप, हाज़िरी और बैंक में आए वेतन का रिकॉर्ड रखें। दुर्घटना देखने वाले साथी कर्मचारियों के नाम लिखें। मृत्यु के मामले में FIR, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र रखें।

अब कौन सा कानून लागू है

21 नवंबर 2025 से सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 का अध्याय VII (धारा 73–99) कर्मचारी मुआवज़े पर लागू है; कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 (पुराना ‘वर्कमेन्स कम्पेंसेशन एक्ट’) निरस्त हो गया, पर इंटरनेट पर अब भी उसकी धाराएँ खोजी जाती हैं — धारा 3 ज़िम्मेदारी (अब धारा 74), धारा 4 राशि (धारा 76), धारा 4A ब्याज और जुर्माना (धारा 77), धारा 10 दावा (धारा 82), धारा 30 अपील (धारा 99)। लंबित मामले और पुराने आदेश बचत प्रावधान के तहत जारी रहते हैं। अगर कर्मचारी ESI में शामिल है, तो रोज़गार-चोट के लाभ ESIC देता है (अस्थायी और स्थायी विकलांगता लाभ, आश्रित लाभ), इसलिए पहले ESI कार्ड देखें।

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नियोक्ता कब ज़िम्मेदार है

‘रोज़गार से और रोज़गार के दौरान’ हुई दुर्घटना या सूचीबद्ध व्यावसायिक बीमारी से हुई चोट पर नियोक्ता को मुआवज़ा देना होता है (धारा 74(1))। ड्यूटी के लिए घर और कार्यस्थल के बीच आते-जाते हुई दुर्घटना भी शामिल है, अगर उसका नौकरी से संबंध दिखाया जाए (धारा 74(4))। 3 दिन या उससे कम विकलांगता वाली चोट पर ज़िम्मेदारी नहीं; और जो चोट मृत्यु या स्थायी पूर्ण विकलांगता न लाए, उसमें नियोक्ता बच सकता है अगर दुर्घटना सीधे कर्मचारी के नशे में होने, सुरक्षा आदेश की जानबूझकर अवहेलना या सुरक्षा उपकरण हटाने से हुई। ठेकेदार के मज़दूर मुख्य नियोक्ता से दावा कर सकते हैं, जो फिर ठेकेदार से वसूल सकता है (धारा 85)।

कितना मुआवज़ा

धारा 76 के अनुसार: मृत्यु पर — मासिक वेतन का 50% × कर्मचारी की उम्र का ‘संबंधित गुणांक’ (छठी अनुसूची), या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित राशि, जो ज़्यादा हो; स्थायी पूर्ण विकलांगता पर — मासिक वेतन का 60% × संबंधित गुणांक, या अधिसूचित राशि, जो ज़्यादा हो; स्थायी आंशिक विकलांगता पर — कमाई की क्षमता में हुए नुकसान का प्रतिशत (चौथी अनुसूची या चिकित्सकीय आकलन) उस पूर्ण विकलांगता राशि का; अस्थायी विकलांगता पर — मासिक वेतन के 25% का अर्ध-मासिक भुगतान (5 साल तक)। इसके अलावा इलाज का वास्तविक ख़र्च नियोक्ता लौटाता है, और मृत्यु पर नियोक्ता को अंतिम संस्कार के लिए कम से कम ₹15,000 जमा करने होते हैं। कम उम्र के कर्मचारी का गुणांक ज़्यादा होता है, इसलिए पिछले जन्मदिन की उम्र अहम है।

भुगतान, देरी पर ब्याज और जुर्माना

मुआवज़ा देय होते ही चुकाना होता है। अगर नियोक्ता कुछ हिस्से पर विवाद करे, तब भी जितनी ज़िम्मेदारी वह मानता है उतना अस्थायी भुगतान करना होगा (धारा 77(2))। एक महीने से ज़्यादा चूक पर सक्षम प्राधिकारी ब्याज का आदेश देगा, और देरी का कोई औचित्य न हो तो नियोक्ता को सुनकर बकाया के 50% तक अतिरिक्त जुर्माना भी लगा सकता है (धारा 77(3))। मृत्यु के मामलों में मुआवज़ा सक्षम प्राधिकारी के पास जमा होना ज़रूरी है, जो आश्रितों को सुनकर बाँटता है (धारा 81); नियोक्ता का सीधा भुगतान मुआवज़ा नहीं माना जाता, सिवाय तीन महीने के वेतन तक के अग्रिम के — इसलिए जमा की जगह थोड़ा नकद ‘समझौता’ स्वीकार न करें।

दावा कहाँ और कब करें

अगर नियोक्ता भुगतान न करे, तो कर्मचारी मुआवज़े के सक्षम प्राधिकारी (पहले ‘कर्मचारी प्रतिकर आयुक्त’ — आम तौर पर राज्य श्रम विभाग का अधिकारी) के सामने दावा करें, उस क्षेत्र में जहाँ दुर्घटना हुई या जहाँ कर्मचारी / आश्रित रहते हैं। दावा आम तौर पर दुर्घटना या मृत्यु से 2 साल के भीतर करना होता है (धारा 82(1)); पर्याप्त कारण होने पर देरी माफ़ हो सकती है, इसलिए देर से भी कारण के साथ दावा करना उपयोगी है। नौकरी, वेतन, उम्र, इलाज / विकलांगता प्रमाण पत्र और मृत्यु में आश्रितों के रिश्ते का सबूत लगाएँ। कानून के गंभीर प्रश्न पर कोई भी पक्ष 60 दिन में हाईकोर्ट में अपील कर सकता है (धारा 99)।

ड्यूटी पर सड़क दुर्घटना, दीवानी मुक़दमा और आपराधिक मामला

अगर ड्राइवर, हेल्पर या डिलीवरी कर्मचारी ड्यूटी पर सड़क दुर्घटना में घायल हो, तो दावा या तो मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में या कर्मचारी मुआवज़ा कानून में किया जा सकता है, दोनों में नहीं (मोटर वाहन अधिनियम धारा 167) — दाखिल करने से पहले तुलना करें कि कौन सा बेहतर है। इसी तरह कर्मचारी मुआवज़े का दावा करने पर उसी दुर्घटना के लिए अलग दीवानी हर्जाने का मुक़दमा नहीं चलता (धारा 74(7))। जहाँ सुरक्षा उपकरण न देने जैसी गंभीर लापरवाही से मृत्यु हुई, वहाँ BNS धारा 106(1) (पुरानी IPC 304A) में पुलिस केस और फ़ैक्ट्री / श्रम निरीक्षक से शिकायत अलग रास्ते हैं।

आम तौर पर ज़रूरी काग़ज़

निर्धारित प्रारूप में दावा आवेदन; नौकरी का सबूत (पहचान पत्र, नियुक्ति पत्र, PF / ESI नंबर, सैलरी स्लिप, हाज़िरी, बैंक में वेतन, साथी कर्मचारियों के बयान); उम्र का सबूत; इलाज के काग़ज़, MLC, मेडिकल बोर्ड का विकलांगता प्रमाण पत्र; मृत्यु में FIR, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र; आश्रितों की सूची और रिश्ते का सबूत; बैंक विवरण; और नियोक्ता को भेजे पत्रों की प्रतियाँ।

अधिवक्ता कैसे मदद कर सकता है

हम मुआवज़ा, ESI या MACT दावे दाखिल नहीं करते, और किसी नियोक्ता, बीमा कंपनी या श्रम कार्यालय से संपर्क नहीं करते। अधिवक्ता एक सुविधा प्लेटफ़ॉर्म है, लॉ फर्म नहीं। हम केस दाखिल नहीं करते, किसी प्राधिकरण के सामने उपस्थित नहीं होते, और किसी परिणाम का वादा नहीं करते। स्वतंत्र अधिवक्ता से सामान्य मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ पर अपनी स्थिति लिखें, या तथ्यों और काग़ज़ों को व्यवस्थित करने के लिए AI सहायक से शुरू करें। केवल शैक्षिक जानकारी — औपचारिक कानूनी सलाह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काम पर दुर्घटना का मुआवज़ा किस कानून में मिलता है?
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अध्याय VII में, जो 21 नवंबर 2025 से लागू है और जिसने कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 की जगह ली। ESI में शामिल कर्मचारियों को रोज़गार-चोट लाभ ESIC से मिलते हैं।
मज़दूर की मृत्यु पर कितना मुआवज़ा मिलता है?
मासिक वेतन का 50% × कर्मचारी की उम्र का संबंधित गुणांक, या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित राशि, जो ज़्यादा हो (धारा 76), और अंतिम संस्कार के लिए कम से कम ₹15,000 की जमा। यह सक्षम प्राधिकारी के पास जमा होकर आश्रितों में बँटता है।
क्या काम पर जाते हुए रास्ते की दुर्घटना शामिल है?
हाँ, ड्यूटी के लिए घर और कार्यस्थल के बीच आते-जाते हुई दुर्घटना रोज़गार से हुई मानी जाती है, अगर उसका नौकरी से संबंध साबित हो (धारा 74(4))।
मुआवज़े का दावा करने की समय-सीमा क्या है?
आम तौर पर दुर्घटना या मृत्यु से 2 साल (धारा 82)। देरी का पर्याप्त कारण हो तो सक्षम प्राधिकारी देर से किया गया दावा भी सुन सकता है।
नियोक्ता भुगतान में देरी करे तो?
देय होने के एक महीने में भुगतान न हो, तो सक्षम प्राधिकारी ब्याज का आदेश देगा और बेवजह देरी पर बकाया के 50% तक जुर्माना भी जोड़ सकता है (धारा 77)।
ड्यूटी पर सड़क दुर्घटना में क्या कर्मचारी मुआवज़ा और MACT दोनों में दावा कर सकते हैं?
नहीं। मोटर वाहन अधिनियम धारा 167 के तहत एक ही मंच चुनना होता है — मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण या कर्मचारी मुआवज़ा प्राधिकारी — दोनों नहीं।

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