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आवारा या पालतू कुत्ते ने काट लिया? भारत में क्या करें — प्राथमिक उपचार और एंटी-रेबीज़ टीका, नगर निकाय और पुलिस में शिकायत (BNS धारा 291), मुआवज़ा (पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का फ़ॉर्मूला, राज्य योजनाएँ, हाई कोर्ट रिट) और आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के 2025–26 के आदेश (2026)

कुत्ते के काटने या हमले के बाद पीड़ितों और माता-पिता के लिए सरल गाइड: तुरंत इलाज के कदम, सबूत रखना, नगर निगम या पंचायत में शिकायत, लापरवाह पालतू-मालिक पर पुलिस कार्रवाई, मुआवज़ा माँगने के रास्ते, और स्कूल, अस्पताल व सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है। केवल शैक्षिक जानकारी — कानूनी या चिकित्सा सलाह नहीं। अधिवक्ता आपकी ओर से शिकायत या दावा दाखिल नहीं करता।

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अभी: घाव धोएँ और टीका लगवाएँ

काटे या खरोंचे हुए हिस्से को साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएँ और एंटीसेप्टिक लगाएँ — राष्ट्रीय रेबीज़ नियंत्रण कार्यक्रम इसे सबसे ज़रूरी प्राथमिक उपचार बताता है। मिर्च, तेल, हल्दी जैसे घरेलू नुस्ख़े न लगाएँ और देर न करें। उसी दिन नज़दीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र जाकर एंटी-रेबीज़ टीका लगवाएँ; गहरे घाव या चेहरे, सिर, हाथ पर काटने में रेबीज़ इम्युनोग्लोबुलिन भी लग सकता है। डॉक्टर के बताए हर डोज़ को पूरा करें। राष्ट्रीय रेबीज़ नियंत्रण कार्यक्रम में टीका सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आम तौर पर बिना शुल्क उपलब्ध कराया जाता है, और सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में राज्यों को सभी सरकारी चिकित्सा केंद्रों में एंटी-रेबीज़ टीका और इम्युनोग्लोबुलिन उपलब्ध रखने का निर्देश दिया है।

पहले दिन से सबूत रखें

अस्पताल से OPD / इलाज की पर्ची और टीकाकरण कार्ड लें, और चोट गंभीर हो तो मेडिको-लीगल (MLC) एंट्री करवाएँ। घाव (आकार दिखाने के लिए सिक्का या स्केल के साथ), जगह, और सुरक्षित हो तो कुत्ते की फ़ोटो लें। तारीख़, समय, सही जगह, और गवाहों के नाम-नंबर लिखें। दवा, आने-जाने और काम के नुक़सान के सभी बिल रखें। पालतू कुत्ता हो तो मालिक का नाम-पता लिखें। किसी भी शिकायत या मुआवज़े के दावे में ये काग़ज़ लगते हैं।

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नगर निकाय या पंचायत में शिकायत

पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियम, 2023 के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण स्थानीय निकाय की ज़िम्मेदारी है। काटने की घटना और जगह की सूचना अपने नगर निगम / नगर परिषद (हेल्पलाइन, ऐप, या पशु-चिकित्सा / डॉग-कंट्रोल विभाग को लिखित शिकायत) या गाँव में ग्राम पंचायत / ब्लॉक कार्यालय को दें और शिकायत नंबर रखें। अगर कुत्ता आक्रामक या पागल लगे, या एक ही जगह कई लोगों को काटा गया हो, तो यह ज़रूर लिखें। कुत्ते को न मारें, न ज़हर दें — जानवरों को नुक़सान पहुँचाना अपराध है (पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 धारा 11; BNS धारा 325, पुरानी IPC 428 / 429)।

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश

आवारा कुत्तों पर स्वतः संज्ञान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 के आदेश में कहा कि स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, खेल परिसर, बस अड्डे / डिपो और रेलवे स्टेशन जैसी संस्थागत जगहों से आवारा कुत्तों को हटाकर, नसबंदी और टीकाकरण के बाद शेल्टर में रखा जाए और उसी जगह वापस न छोड़ा जाए; 19 मई 2026 के फ़ैसले (2026 INSC 506) में कोर्ट ने इसे बरक़रार रखा, हर ज़िले में कम से कम एक पशु जन्म नियंत्रण केंद्र बनाने को कहा, और कहा कि परिसरों के अंदर कुत्तों को खाना खिलाने वाले समूहों को हलफ़नामा देकर ज़िम्मेदारी लेनी होगी। 13 जनवरी 2026 की सुनवाई में बेंच ने मौखिक रूप से यह भी कहा था कि वह कुत्ते के काटने पर राज्यों से भारी मुआवज़ा दिलवा सकती है — इस पर भरोसा करने से पहले ताज़ा आदेश देखें। ऐसी किसी जगह के अंदर काटने की घटना हो तो इन आदेशों का हवाला देकर संस्था प्रमुख और स्थानीय निकाय को लिखें।

पालतू कुत्ते ने काटा — मालिक पर पुलिस शिकायत

जो मालिक जानबूझकर या लापरवाही से ऐसे कुत्ते को नियंत्रित नहीं करता जिससे मानव जीवन को ख़तरा या गंभीर चोट हो सकती हो, उस पर BNS धारा 291 (पुरानी IPC 289; छह महीने तक, या ₹5,000 तक जुर्माना, या दोनों) में मुक़दमा चल सकता है। मेडिकल काग़ज़ों के साथ थाने में लिखित शिकायत दें; गंभीर चोट में पुलिस BNS के दूसरे प्रावधान भी देख सकती है। कार्यपालक मजिस्ट्रेट BNSS धारा 152 (पुरानी CrPC 133) में ख़तरनाक जानवर को बाँधकर रखने या हटाने का सशर्त आदेश भी दे सकते हैं। कई शहरों में पालतू कुत्ते का पंजीकरण और सार्वजनिक जगह पर पट्टा ज़रूरी है — अपने नगर निकाय के उपनियम देखें। मालिक पर दीवानी अदालत में हर्जाने का दावा भी हो सकता है।

मुआवज़ा — कौन से रास्ते हैं

पूरे देश के लिए एक तय मुआवज़ा राशि नहीं है। (1) पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (2023) ने उपायुक्त की अध्यक्षता में ज़िला समितियाँ बनाने का निर्देश दिया जो चार महीने में दावा तय करें — न्यूनतम ₹10,000 प्रति दाँत का निशान, और जहाँ मांस निकल गया हो वहाँ ₹20,000 प्रति 0.2 सेमी घाव; मुख्य ज़िम्मेदारी राज्य की। (2) राज्य योजनाएँ: कुछ राज्यों में आवारा पशुओं से मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर योजनाएँ हैं — जैसे हरियाणा की दयालु-II (2023)। अपने ज़िला कलेक्टर कार्यालय या स्थानीय निकाय से पूछें कि आपके राज्य में ऐसी योजना है या नहीं। (3) दूसरी जगहों पर पीड़ितों ने आवारा कुत्तों पर नियंत्रण न करने के लिए राज्य / नगर निकाय से मुआवज़े के लिए अनुच्छेद 226 में हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है, या हर्जाने का दीवानी वाद किया है। नतीजा अदालत और तथ्यों पर निर्भर है।

बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए

बच्चे अक्सर छोटी खरोंच या काटना छिपा लेते हैं — उनसे पूछें, और हर काटने को गंभीरता से लें। बच्चों को सिखाएँ कि कुत्ते से भागें नहीं, उसे छेड़ें नहीं, और खाते हुए या पिल्लों वाले कुत्ते के पास न जाएँ। अगर किसी स्कूल के पास बार-बार काटने की घटनाएँ हों, तो माता-पिता मिलकर स्कूल प्रमुख और स्थानीय निकाय को लिख सकते हैं और कॉपी रखें; सामूहिक शिकायत ज़्यादा गंभीरता से ली जाती है।

अधिवक्ता कैसे मदद कर सकता है

हम शिकायत, दावा या याचिका दाखिल नहीं करते, और चिकित्सा सलाह नहीं देते — काटने के बाद तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ। अधिवक्ता एक सुविधा प्लेटफ़ॉर्म है, लॉ फर्म नहीं। हम केस दाखिल नहीं करते, किसी प्राधिकरण के सामने उपस्थित नहीं होते, और किसी परिणाम का वादा नहीं करते। स्वतंत्र अधिवक्ता से सामान्य मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ पर अपनी स्थिति लिखें, या तथ्यों और काग़ज़ों को व्यवस्थित करने के लिए AI सहायक से शुरू करें। केवल शैक्षिक जानकारी — औपचारिक कानूनी सलाह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुत्ते के काटने के तुरंत बाद क्या करें?
घाव को साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट धोएँ, एंटीसेप्टिक लगाएँ, और उसी दिन सरकारी अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज़ टीका लगवाएँ। गहरे घाव में रेबीज़ इम्युनोग्लोबुलिन भी लग सकता है। सभी डोज़ पूरे करें।
क्या सरकारी अस्पताल में एंटी-रेबीज़ टीका मिलता है?
हाँ। राष्ट्रीय रेबीज़ नियंत्रण कार्यक्रम में यह सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आम तौर पर बिना शुल्क उपलब्ध कराया जाता है, और सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में राज्यों को सभी सरकारी चिकित्सा केंद्रों में टीका और इम्युनोग्लोबुलिन रखने का निर्देश दिया है।
आवारा कुत्ते के काटने पर मुआवज़ा मिल सकता है?
संभव है, पर पूरे देश के लिए एक तय राशि नहीं है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में हाई कोर्ट ने न्यूनतम ₹10,000 प्रति दाँत का निशान तय किया; कुछ राज्यों में योजनाएँ हैं; दूसरी जगह लोग अनुच्छेद 226 में हाई कोर्ट जाते हैं या दीवानी वाद करते हैं। नतीजा तथ्यों पर निर्भर है।
पड़ोसी के पालतू कुत्ते ने काटा। क्या FIR हो सकती है?
हाँ, पुलिस शिकायत दी जा सकती है। BNS धारा 291 (पुरानी IPC 289) ख़तरनाक जानवर पर लापरवाही से नियंत्रण न रखने वाले मालिक को दंडित करती है। मेडिकल काग़ज़ और गवाह रखें। दीवानी अदालत में हर्जाना भी माँग सकते हैं।
इलाक़े के आक्रामक आवारा कुत्तों की शिकायत कहाँ करें?
नगर निगम / नगर परिषद (डॉग-कंट्रोल या पशु-चिकित्सा विभाग, हेल्पलाइन या ऐप) या ग्राम पंचायत में, जो पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के तहत नसबंदी और टीकाकरण संभालते हैं। शिकायत नंबर रखें।
क्या काटने वाले कुत्ते को मार सकते हैं?
नहीं। जानवर को मारना, अपंग करना या ज़हर देना अपराध है (पशु क्रूरता निवारण अधिनियम धारा 11; BNS धारा 325)। इसके बजाय स्थानीय निकाय और पुलिस को सूचना दें।

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