Skip to content
Adhiwakta logo — scales of justice in a shield cradled by a handAdhiwakta
Ask

This guide is written in Hindi. Read it in English →

प्रॉपर्टी रजिस्ट्री कैसे होती है — दस्तावेज़, स्टाम्प ड्यूटी, 4 महीने की सीमा

रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत उप-पंजीयक कार्यालय में सेल डीड (रजिस्ट्री) कराने की रूपरेखा: किन दस्तावेज़ों की रजिस्ट्री ज़रूरी (धारा 17), स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और ई-स्टाम्प, 4 महीने की सीमा (धारा 23), फ़ोटो व अंगूठा निशान (धारा 32A), गवाह, TDS और PAN, और रजिस्ट्री के बाद नामांतरण। राज्य-वार प्रक्रिया व शुल्क अलग। केवल शैक्षिक — कानूनी सलाह नहीं।

Send your question on WhatsApp

WhatsApp opens with your question already written. You just tap send.

किन दस्तावेज़ों की रजिस्ट्री ज़रूरी है

रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 की धारा 17 ₹100 या अधिक मूल्य की अचल संपत्ति में अधिकार ट्रांसफ़र या पैदा करने वाले दस्तावेज़ों की रजिस्ट्री अनिवार्य करती है — सेल डीड, गिफ़्ट डीड, ज़्यादातर बंधक, एक वर्ष से अधिक के पट्टे, और (2001 के बाद) आंशिक पालन के लिए उपयोग होने वाले बिक्री इकरारनामे। अनिवार्य रजिस्ट्री वाला दस्तावेज़ बिना रजिस्ट्री संपत्ति को प्रभावित नहीं करता (धारा 49)। वसीयत की रजिस्ट्री वैकल्पिक है।

रजिस्ट्री से पहले

हक़ की जाँच करें और भार प्रमाण पत्र लें, ताज़ा नामांतरण और संपत्ति कर रसीदें देखें, सर्किल रेट / गाइडलाइन मूल्य जाँचें, और सेल डीड का मसौदा तय करें। स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क हर राज्य तय करता है (कुछ राज्य महिला ख़रीदार को छूट देते हैं) और आम तौर पर बिक्री मूल्य और सरकारी मूल्य में से जो अधिक हो उस पर लगते हैं। कई राज्य ई-स्टाम्प (जैसे SHCIL से) देते हैं और डेटा एंट्री, शुल्क भुगतान व स्लॉट बुकिंग के लिए NGDRS या अपने पोर्टल इस्तेमाल करते हैं।

Is your situation a little different? Send your question on WhatsApp.

Write in Hindi or English · general guidance, not legal advice

Ask on WhatsApp

आम तौर पर लगने वाले दस्तावेज़

सही स्टाम्प मूल्य पर सेल डीड का मसौदा; ख़रीदार, विक्रेता और गवाहों का पहचान व पता प्रमाण (आम तौर पर आधार); पक्षकारों का PAN (₹10 लाख से ऊपर के सौदों में आम तौर पर ज़रूरी); पासपोर्ट फ़ोटो; पिछला हक़ विलेख और नामांतरण प्रति; भार प्रमाण पत्र; संपत्ति कर व बिल रसीदें; जहाँ लागू हो स्वीकृत नक्शा या आवंटन/NOC पत्र; कोई और हस्ताक्षर करे तो पावर ऑफ़ अटॉर्नी; और लागू हो तो TDS जमा का प्रमाण — ख़रीदार को आयकर TDS काटना होता है (मूल्य ₹50 लाख या अधिक होने पर 1%) और निर्धारित विवरण के साथ जमा करना होता है।

उप-पंजीयक कार्यालय में

दस्तावेज़ उस कार्यालय में प्रस्तुत होता है जिसके क्षेत्र में संपत्ति (या उसका हिस्सा) है (धारा 28)। निष्पादक — विक्रेता और ख़रीदार, या उनके अधिकृत एजेंट — को उपस्थित होना होता है (धारा 32, 34, 35)। धारा 32A के तहत उनकी फ़ोटो और अंगूठा निशान लगते हैं, और उप-पंजीयक आम तौर पर दो गवाहों के साथ पहचान और निष्पादन की स्वीकृति जाँचता है। निष्पादन के चार महीने में प्रस्तुत करना होता है (धारा 23), जुर्माने के साथ चार महीने और (धारा 25)। रजिस्ट्री के बाद दस्तावेज़ पर पृष्ठांकन और स्कैन होता है; रजिस्टर्ड प्रति (या राज्य के अनुसार डिजिटल प्रति) वापस मिलती है।

रजिस्ट्री के बाद

राजस्व या नगर निगम रिकॉर्ड में नामांतरण (दाख़िल-ख़ारिज) के लिए आवेदन करें, संपत्ति कर और बिजली-पानी कनेक्शन अपडेट करें, और रजिस्टर्ड डीड सुरक्षित रखें। ज़रूरत हो तो बाद में उप-पंजीयक से प्रमाणित प्रति ली जा सकती है। रजिस्ट्री हक़ की गारंटी नहीं — यह लेन-देन दर्ज करती है; हक़ दस्तावेज़ों की कड़ी पर निर्भर रहता है।

आम ग़लतियाँ

बिना रसीद नकद भुगतान, स्टाम्प ड्यूटी बचाने के लिए कम मूल्य दिखाना (राज्य स्टाम्प एक्ट के तहत दस्तावेज़ ज़ब्त होकर कमी ड्यूटी और जुर्माना वसूला जा सकता है), सह-मालिकों के हस्ताक्षर छूटना, भार जाँच न करना, और रजिस्टर्ड डीड की जगह GPA या नोटरी इकरारनामे पर भरोसा करना।

अधिवक्ता कैसे मदद कर सकता है

हम स्लॉट बुक नहीं करते, ड्यूटी नहीं भरते और दस्तावेज़ रजिस्टर नहीं कराते। अधिवक्ता (Adhiwakta) एक सुविधा मंच है, लॉ फ़र्म नहीं। हम केस दाखिल नहीं करते, किसी प्राधिकरण के सामने पेश नहीं होते और किसी परिणाम का वादा नहीं करते। अपनी स्थिति बताकर स्वतंत्र अधिवक्ता से सामान्य मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ का उपयोग करें, या तथ्य और कागज़ व्यवस्थित करने के लिए AI सहायक से शुरू करें। केवल शैक्षिक — औपचारिक कानूनी सलाह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेल डीड की रजिस्ट्री की समय-सीमा क्या है?
रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 की धारा 23 के तहत दस्तावेज़ निष्पादन के चार महीने में रजिस्ट्री के लिए प्रस्तुत करना होता है। धारा 25 में जुर्माने के साथ चार महीने और मिल सकते हैं।
उप-पंजीयक कार्यालय में किसे उपस्थित होना होता है?
निष्पादक (विक्रेता और ख़रीदार) या उनके अधिकृत एजेंट, आम तौर पर दो गवाहों के साथ। धारा 32A के तहत उनकी फ़ोटो और अंगूठा निशान लिए जाते हैं।
क्या नामांतरण और रजिस्ट्री एक ही हैं?
नहीं। रजिस्ट्री ट्रांसफ़र दस्तावेज़ दर्ज करती है; नामांतरण (दाख़िल-ख़ारिज) राजस्व या नगर निगम रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम चढ़ाता है और इसके लिए अलग आवेदन होता है।

Share Adhiwakta with someone who needs it

Send this page on WhatsApp — legal information in Hindi & English.

Ask on WhatsAppForm