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RTI प्रथम अपील कैसे करें — 30 दिन में जवाब नहीं, द्वितीय अपील 90 दिन

RTI आवेदन का जवाब न मिले, अधूरा मिले या मना हो जाए तो: 30 दिन का नियम (जीवन या स्वतंत्रता के मामले में 48 घंटे), मानी गई अस्वीकृति, 30 दिन में प्रथम अपील (धारा 19(1)), 30–45 दिन में फ़ैसला, 90 दिन में केंद्रीय या राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील, और जुर्माना। केवल शैक्षिक जानकारी।

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PIO को कितने दिन में जवाब देना है

लोक सूचना अधिकारी (PIO) को आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर जवाब देना है; किसी के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी सूचना हो तो 48 घंटे में (RTI अधिनियम, 2005 की धारा 7(1))। सहायक PIO के पास दाखिल किया हो तो 5 दिन और जुड़ते हैं (धारा 5(2))। आवेदन दूसरे प्राधिकरण को भेजना हो तो 5 दिन में भेजना होता है (धारा 6(3))। समय पर फ़ैसला न हो तो इसे अस्वीकृति माना जाता है (धारा 7(2)), और देर से दी गई सूचना मुफ़्त देनी होती है (धारा 7(6))।

प्रथम अपील कब करें

समय-सीमा में जवाब न मिले, अधूरा या भ्रामक जवाब मिले, धारा 8 या 9 की वैध छूट के बिना मना किया जाए, या अनुचित शुल्क माँगा जाए — तो प्रथम अपील करें। अपील जवाब की अवधि ख़त्म होने या जवाब मिलने के 30 दिन के भीतर करनी होती है (धारा 19(1)); पर्याप्त कारण दिखाने पर अपीलीय अधिकारी देर से अपील भी स्वीकार कर सकता है।

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प्रथम अपील कैसे करें

प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) को संबोधित करें — उसी प्राधिकरण में PIO से वरिष्ठ अधिकारी (नाम आमतौर पर PIO के जवाब में या विभाग की वेबसाइट पर होता है)। केंद्र सरकार के विभागों के लिए rtionline.gov.in पर ऑनलाइन अपील हो सकती है; कई राज्यों के अपने पोर्टल हैं। लिखें: नाम-पता, RTI आवेदन की तारीख और पंजीकरण संख्या, PIO का विवरण, जवाब की तारीख (यदि मिला), आधार, और क्या चाहते हैं (जैसे ‘धारा 7(6) के तहत सूचना मुफ़्त दी जाए’)। केंद्रीय RTI नियम, 2012 में प्रथम अपील पर कोई शुल्क नहीं; कुछ राज्य शुल्क लेते हैं — अपने राज्य के नियम देखें।

फ़ैसले की समय-सीमा

FAA को अपील मिलने के 30 दिन में फ़ैसला करना चाहिए, लिखित कारण दर्ज कर 45 दिन तक (धारा 19(6))। सुनवाई में बुलाया जाए तो जाएँ और जमा किए सभी कागज़ों की प्रतियाँ रखें।

सूचना आयोग में द्वितीय अपील

FAA फ़ैसला न करे या आप संतुष्ट न हों, तो फ़ैसला देय होने या मिलने की तारीख से 90 दिन के भीतर केंद्रीय सूचना आयोग (केंद्र सरकार के निकायों के लिए) या राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील करें (धारा 19(3))। आयोग सूचना देने का आदेश, आपको मुआवज़ा और जुर्माना लगा सकता है।

शिकायत बनाम द्वितीय अपील

धारा 18 की शिकायत उन समस्याओं के लिए है जैसे PIO नियुक्त न होना या आवेदन लेने से मना करना; आयोग जाँच कर जुर्माना लगा सकता है। पर अगर आप सूचना दिलवाने का आदेश चाहते हैं, तो धारा 19 की अपील का रास्ता अपनाएँ — सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सूचना आयुक्त बनाम मणिपुर राज्य (2011) में यह अंतर समझाया।

PIO पर जुर्माना

बिना उचित कारण आवेदन न लेने, देरी या इनकार पर आयोग PIO पर व्यक्तिगत रूप से ₹250 प्रतिदिन, अधिकतम ₹25,000 जुर्माना लगा सकता है (धारा 20)। जुर्माना सरकार को जाता है, आपको नहीं; हानि के लिए आप अलग से मुआवज़ा माँग सकते हैं (धारा 19(8)(b))।

व्यक्तिगत जानकारी पर नोट (2025 का बदलाव)

13 नवंबर 2025 से डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 की धारा 44(3) ने RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) बदल दी — व्यक्तिगत जानकारी की छूट बढ़ी और उस खंड में ‘व्यापक जनहित’ वाला अपवाद हटा। इस संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। व्यक्तियों की निजी जानकारी वाले प्रश्नों पर ज़्यादा इनकार की संभावना है — प्रश्न सरकारी रिकॉर्ड और फ़ैसलों पर केंद्रित रखें।

व्यावहारिक सुझाव और अधिवक्ता (Adhiwakta) की भूमिका

फ़ाइल, तारीख या फ़ैसले से जुड़े स्पष्ट प्रश्न पूछें; डाक का सबूत या ऑनलाइन पंजीकरण संख्या रखें; और 30, 30/45 और 90 दिन की तारीखें नोट करें। गरीबी रेखा से नीचे के आवेदकों को आवेदन शुल्क नहीं देना होता (केंद्र में शुल्क ₹10)। अधिवक्ता RTI या अपील दाखिल नहीं करता और जवाब की गारंटी नहीं देता; सामान्य मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ या AI सहायक का उपयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

30 दिन में RTI का जवाब न मिले तो क्या करें?
इसे अस्वीकृति माना जाता है (धारा 7(2))। 30 दिन के भीतर प्रथम अपीलीय अधिकारी को अपील करें (धारा 19(1)); देर से दी गई सूचना मुफ़्त होनी चाहिए (धारा 7(6))।
द्वितीय अपील की समय-सीमा क्या है?
प्रथम अपील का फ़ैसला देय होने या मिलने से 90 दिन, केंद्रीय या राज्य सूचना आयोग में (धारा 19(3))।

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