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ट्रेडमार्क उल्लंघन — कोई आपका ब्रांड नाम या लोगो कॉपी करे तो पहले कदम (और नोटिस मिले तो क्या करें): ट्रेड मार्क्स अधिनियम धारा 27–29, 134–135, पासिंग ऑफ़, सीज़-एंड-डिसिस्ट नोटिस, धारा 12A मध्यस्थता, पुलिस का रास्ता धारा 103–115 (2026)
छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, स्टार्ट-अप और ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए सरल नक्शा: कैसे जाँचें कि आपका मार्क पंजीकृत है और किन चीज़ों पर; पंजीकृत मार्क का उल्लंघन (धारा 29) बनाम अपंजीकृत मार्क का पासिंग ऑफ़ (धारा 27(2)); कौन-से सबूत जुटाएँ; सीज़-एंड-डिसिस्ट नोटिस; ज़िला न्यायालय या वाणिज्यिक न्यायालय में दीवानी वाद (धारा 134–135) और तत्काल राहत की ज़रूरत न हो तो वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम की धारा 12A के तहत वाद से पहले मध्यस्थता; आपराधिक रास्ता (धारा 103–104, पुलिस तलाशी केवल रजिस्ट्रार की राय के बाद — धारा 115); ऑनलाइन मार्केटप्लेस से लिस्टिंग हटवाना; और अगर आपको खुद नोटिस मिले तो क्या करें, जिसमें निराधार धमकी का उपाय (धारा 142) शामिल है। केवल शैक्षिक — कानूनी सलाह नहीं; अधिवक्ता नोटिस नहीं भेजता और केस दाखिल नहीं करता।
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कदम 1 — देखें कि आपके पास असल में क्या है
IP India वेबसाइट (ipindia.gov.in) पर ट्रेड मार्क्स रजिस्ट्री की पब्लिक सर्च में अपना और दूसरे पक्ष का मार्क खोजें: स्थिति (पंजीकृत, आपत्ति, विरोध, परित्यक्त), माल या सेवा की श्रेणी (क्लास), आवेदन की तारीख और दावा की गई ‘उपयोग’ की तारीख। पंजीकरण मालिक को पंजीकृत माल या सेवाओं के लिए मार्क के अनन्य उपयोग और उल्लंघन का वाद करने का अधिकार देता है (धारा 28)। केवल ‘लंबित’ आवेदन पर उल्लंघन का वाद नहीं हो सकता, पर आपका पहले से उपयोग पासिंग ऑफ़ से सुरक्षित हो सकता है। ब्रांड नाम, लोगो, लेबल, आकार और रंगों का संयोजन भी मार्क हो सकते हैं।
उल्लंघन बनाम पासिंग ऑफ़
उल्लंघन (धारा 29) पंजीकृत मार्क पर लागू होता है: कोई बिना अनुमति व्यापार में ऐसा मार्क इस्तेमाल करे जो पंजीकृत मार्क जैसा या भ्रामक रूप से मिलता-जुलता हो, पंजीकरण में शामिल माल या सेवाओं के लिए (और कुछ स्थितियों में मिलते-जुलते माल या सुप्रसिद्ध मार्क के लिए)। पासिंग ऑफ़ पंजीकरण के बिना भी साख की रक्षा करता है (धारा 27(2)): आपको दिखाना होता है कि साख और प्रतिष्ठा पहले आपकी थी, दूसरे पक्ष का उपयोग उसके माल को आपका या आपसे जुड़ा बताकर भ्रम फैलाता है, और इससे आपको नुकसान है या होने की संभावना है। अदालतें कुल प्रभाव, उच्चारण और दिखावट की समानता, खरीदारों का वर्ग और बिक्री के रास्ते देखती हैं। पहले से उपयोग करने वाले के अधिकार बाद के पंजीकृत मालिक के विरुद्ध भी हो सकते हैं (धारा 34)।
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कदम 2 — कार्रवाई से पहले सबूत जुटाएँ
अपने उपयोग के तारीखवार सबूत रखें: पहले बिल, GST और बिक्री रिकॉर्ड, पैकेजिंग, विज्ञापन, वेबसाइट और सोशल मीडिया के पुराने रिकॉर्ड, और पंजीकरण प्रमाणपत्र। दूसरे पक्ष के लिए बिल के साथ सैंपल खरीदें, लिस्टिंग, वेबसाइट और दुकान के बोर्ड के तारीखवार स्क्रीनशॉट (URL सहित) लें, और नोट करें कि वे कहाँ और कब से बेच रहे हैं। ग्राहकों में वास्तविक भ्रम के सबूत — ग़लत ऑर्डर, शिकायतें, रिव्यू — बहुत काम आते हैं। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक आरोप न लगाएँ; इससे मानहानि का विवाद हो सकता है।
कदम 3 — सीज़-एंड-डिसिस्ट नोटिस
कई विवाद एक लिखित नोटिस से शुरू होते हैं जिसमें आपका मार्क और पंजीकरण या पहले से उपयोग बताया जाता है, नकल का विवरण दिया जाता है, और दूसरे पक्ष से तय समय में उपयोग बंद करने, स्टॉक और लिस्टिंग हटाने और लिखित पुष्टि करने को कहा जाता है। वाद से पहले नोटिस अनिवार्य नहीं है, और आक्रामक या बढ़ा-चढ़ाकर लिखा नोटिस उल्टा पड़ सकता है: जिसे निराधार उल्लंघन कार्रवाई की धमकी दी गई हो, वह निराधार धमकी के विरुद्ध घोषणा और निषेधाज्ञा का वाद कर सकता है (धारा 142)।
कदम 4 — दीवानी वाद: कहाँ और कौन-सी राहत
उल्लंघन या पासिंग ऑफ़ का वाद ज़िला न्यायालय से नीचे की अदालत में नहीं हो सकता (धारा 134)। पंजीकृत मार्क का मालिक वहाँ भी वाद कर सकता है जहाँ वह वास्तव में रहता या कारोबार करता है (धारा 134(2))। ज़्यादातर ट्रेडमार्क विवाद वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 के तहत ‘वाणिज्यिक विवाद’ हैं और वाणिज्यिक न्यायालय या मूल अधिकारिता वाले हाई कोर्ट (जैसे दिल्ली, बॉम्बे, मद्रास, कलकत्ता) में जाते हैं। राहतों में निषेधाज्ञा (अंतरिम या एकपक्षीय आदेश सहित), वादी की पसंद पर हर्जाना या मुनाफ़े का हिसाब, और उल्लंघनकारी लेबल व माल को नष्ट करने के लिए सौंपना शामिल हैं (धारा 135)। कार्रवाई में देरी तत्काल निषेधाज्ञा की माँग को कमज़ोर कर सकती है, इसलिए बैठे न रहें।
धारा 12A — पहले मध्यस्थता, जब तक तत्काल राहत ज़रूरी न हो
वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम की धारा 12A के अनुसार वाणिज्यिक वाद से पहले मध्यस्थता (आम तौर पर विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से) ज़रूरी है, जब तक वाद में वास्तव में तत्काल अंतरिम राहत न माँगी गई हो। सुप्रीम कोर्ट ने पाटिल ऑटोमेशन बनाम राखेजा इंजीनियर्स (2022) में इसे अनिवार्य माना, और नोवेन्को बिल्डिंग एंड इंडस्ट्री बनाम ज़ीरो एनर्जी (2025) में माना कि लगातार चल रहा IP उल्लंघन कुछ देरी के बाद भी तत्काल राहत का आधार हो सकता है — पर वाद-पत्र में असली तात्कालिकता दिखनी चाहिए, केवल औपचारिक प्रार्थना नहीं।
आपराधिक रास्ता
ट्रेड मार्क को झूठा बनाना या झूठा लगाना धारा 103 में दंडनीय है (छह महीने से तीन वर्ष तक कारावास और ₹50,000 से ₹2 लाख तक जुर्माना), और झूठे मार्क वाला माल बेचना धारा 104 में। ये अपराध संज्ञेय हैं, पर उप पुलिस अधीक्षक या उससे ऊपर के अधिकारी को बिना वारंट तलाशी और ज़ब्ती से पहले तथ्यों पर रजिस्ट्रार की राय लेनी और उसका पालन करना होता है (धारा 115(4))। आपराधिक कार्रवाई आम तौर पर स्पष्ट नकली माल के विरुद्ध होती है, मिलते-जुलते नामों के ईमानदार विवादों में नहीं।
ऑनलाइन विक्रेता, डोमेन और मार्केटप्लेस
बड़े मार्केटप्लेस और प्लेटफ़ॉर्म अपने ब्रांड-सुरक्षा या IP शिकायत फ़ॉर्म चलाते हैं, और IT नियम, 2021 के तहत मध्यवर्ती संस्थाओं के पास शिकायत अधिकारी होना ज़रूरी है — अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र और लिस्टिंग लिंक तैयार रखें। .in डोमेन नाम के विवाद NIXI की INDRP नीति से चलते हैं। प्लेटफ़ॉर्म से लिस्टिंग हटना अदालत का आदेश नहीं है, और दूसरा विक्रेता उसका विरोध कर सकता है।
यदि आपको नोटिस मिला है या आप पर वाद हुआ है
इसे अनदेखा न करें, और जल्दबाज़ी में कोई वचन-पत्र न लिखें। जाँचें कि दूसरे पक्ष का मार्क सच में पंजीकृत है और किस क्लास में, उपयोग की तारीखें मिलाएँ (आपका उपयोग पहले का हो सकता है — धारा 34), और अपने बिल व रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। दिए गए समय में जवाब भेजा जा सकता है। वाद दाखिल हो तो लिखित कथन की तारीख नोट करें — वाणिज्यिक वादों में समय-सीमा कड़ी है। पंजीकरण को हाई कोर्ट में सुधार (रेक्टिफ़िकेशन) याचिका से चुनौती दी जा सकती है (धारा 57; IPAB 2021 में समाप्त हो गया), और वैधता तय होने तक उल्लंघन वाद रुक सकता है (धारा 124)। किसी नए आवेदन का विरोध ट्रेड मार्क्स जर्नल में विज्ञापन से चार महीने के भीतर करना होता है (धारा 21)।
यह गाइड क्या नहीं है
यह नहीं बताता कि दो मार्क भ्रामक रूप से मिलते-जुलते हैं या नहीं, आपको निषेधाज्ञा मिलेगी या नहीं, या कितना हर्जाना संभव है — यह विस्तृत तथ्यों और सबूतों पर निर्भर है। रजिस्ट्री की फ़ीस, फ़ॉर्म और अदालती प्रक्रिया बदलती रहती है, इसलिए IP India और अदालत के वर्तमान नियम देखें।
अधिवक्ता कैसे मदद कर सकता है
हम ट्रेडमार्क सर्च या फ़ाइल नहीं करते, नोटिस नहीं भेजते या उनका जवाब नहीं देते, वाद या शिकायत दाखिल नहीं करते, और दूसरे कारोबार से संपर्क नहीं करते। अधिवक्ता एक सुविधा प्लेटफ़ॉर्म है, लॉ फर्म नहीं। हम केस दाखिल नहीं करते, किसी प्राधिकरण के सामने उपस्थित नहीं होते, और किसी परिणाम का वादा नहीं करते। स्वतंत्र अधिवक्ता से सामान्य मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ का उपयोग करें, या तथ्यों और कागज़ात व्यवस्थित करने के लिए AI सहायक से शुरू करें। केवल शैक्षिक — औपचारिक कानूनी सलाह नहीं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- कोई मेरा ब्रांड नाम इस्तेमाल कर रहा है। ट्रेडमार्क पंजीकृत न हो तो क्या वाद कर सकता हूँ?
- अपंजीकृत मार्क के उल्लंघन का वाद नहीं हो सकता, पर यदि आप पहले की साख और दूसरे पक्ष के उपयोग से खरीदारों में भ्रम दिखा सकें तो पासिंग ऑफ़ का वाद हो सकता है (ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999 की धारा 27(2))।
- ट्रेडमार्क उल्लंघन का केस कौन-सी अदालत सुनती है?
- ज़िला न्यायालय से नीचे की कोई अदालत नहीं (धारा 134); पंजीकृत मार्क का मालिक वहाँ भी वाद कर सकता है जहाँ वह रहता या कारोबार करता है। ज़्यादातर ऐसे विवाद वाणिज्यिक विवाद हैं जो वाणिज्यिक न्यायालय या मूल अधिकारिता वाले हाई कोर्ट में चलते हैं।
- क्या ट्रेडमार्क वाद से पहले मध्यस्थता ज़रूरी है?
- वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम की धारा 12A के अनुसार वाद से पहले मध्यस्थता अनिवार्य है, जब तक वाद में वास्तव में तत्काल अंतरिम राहत न माँगी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि लगातार उल्लंघन तात्कालिकता का आधार हो सकता है, पर यह तथ्यों से दिखाना होता है।
- अदालत कौन-सी राहत दे सकती है?
- निषेधाज्ञा (अंतरिम या एकपक्षीय सहित), वादी की पसंद पर हर्जाना या मुनाफ़े का हिसाब, और उल्लंघनकारी लेबल व माल नष्ट करने के लिए सौंपना (धारा 135)।
- नकली ब्रांड के लिए क्या पुलिस के पास जा सकते हैं?
- मार्क को झूठा लगाना और ऐसा माल बेचना अपराध हैं (धारा 103–104), पर उप पुलिस अधीक्षक या ऊपर के अधिकारी को बिना वारंट तलाशी और ज़ब्ती से पहले रजिस्ट्रार की राय लेनी होती है (धारा 115(4))। आपराधिक रास्ता ज़्यादातर स्पष्ट नकली माल के लिए है।
- मुझे ट्रेडमार्क का कानूनी नोटिस मिला है। क्या करूँ?
- इसे अनदेखा न करें और जल्दबाज़ी में कुछ न लिखें। दूसरे पक्ष का पंजीकरण और क्लास जाँचें, अपने उपयोग की तारीखें मिलाएँ, रिकॉर्ड रखें, और दिए गए समय में जवाब दें। निराधार धमकियों को धारा 142 में चुनौती दी जा सकती है।
- क्या अधिवक्ता ट्रेडमार्क नोटिस भेजता है?
- नहीं। अधिवक्ता नोटिस नहीं भेजता या उनका जवाब नहीं देता, ट्रेडमार्क या केस फ़ाइल नहीं करता, और कारोबारों से संपर्क नहीं करता। केवल सामान्य शैक्षिक मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ या AI सहायक उपयोग करें।
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