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छेड़छाड़, फब्तियाँ या पीछा करना — भारत में पुलिस शिकायत कैसे करें: BNS धारा 74 (पुरानी IPC 354), धारा 75, धारा 78 पीछा करना (पुरानी 354D), धारा 79 (पुरानी 509), महिला अधिकारी द्वारा बयान, ऑनलाइन स्टॉकिंग, मजिस्ट्रेट के सामने बयान, पीड़ित मुआवज़ा (2026)

उस महिला या लड़की (या उसके परिवार) के लिए सरल गाइड जो छूने या दबोचने, अश्लील टिप्पणी या इशारे, पीछा किए जाने, बार-बार अनचाहे संपर्क, ऑनलाइन स्टॉकिंग या अश्लील संदेशों का सामना कर रही है: कौन सी BNS धाराएँ लागू होती हैं, सुरक्षित तरीके से कैसे शिकायत करें (112, 181, थाना, ऑनलाइन), शिकायत देते समय उसके अधिकार, कौन से सबूत रखें, आगे क्या होता है, और कार्यस्थल समिति या नाबालिग के लिए POCSO जैसे दूसरे रास्ते। केवल शैक्षिक जानकारी — कानूनी सलाह नहीं। अधिवक्ता कोई शिकायत दाखिल नहीं करता और पुलिस या किसी व्यक्ति से संपर्क नहीं करता।

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अगर आप अभी ख़तरे में हैं

112 (राष्ट्रीय आपातकाल, 112 India ऐप से भी) या महिला हेल्पलाइन 181 पर कॉल करें। किसी सुरक्षित, सार्वजनिक जगह पर जाएँ और किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताएँ। समय और जगह नोट करें, और सुरक्षित हो तो व्यक्ति का हुलिया, गाड़ी नंबर या फ़ोन नंबर भी। 18 साल से कम उम्र की लड़की के लिए 1098 (चाइल्डलाइन) पर भी कॉल करें।

कौन सा कानून लागू होता है

1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता, 2023 लागू है। महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या बल प्रयोग (दबोचना, कपड़े खींचना) — BNS धारा 74, पुरानी IPC 354 (1 से 5 साल और जुर्माना)। यौन उत्पीड़न — अनचाहा शारीरिक संपर्क, यौन माँग, अश्लील सामग्री दिखाना, यौन टिप्पणी — धारा 75, पुरानी 354A। दृश्यरतिकता (निजी पलों को देखना या तस्वीर लेना) — धारा 77, पुरानी 354C। पीछा करना — पीछा करना, साफ़ मना करने के बावजूद बार-बार संपर्क करना, या उसके इंटरनेट, ईमेल या इलेक्ट्रॉनिक संचार पर नज़र रखना — धारा 78, पुरानी 354D (पहली बार में 3 साल तक, दोबारा में 5 साल तक)। महिला की लज्जा का अपमान करने वाले शब्द, आवाज़, इशारे या वस्तु — धारा 79, पुरानी 509 (3 साल तक और जुर्माना)। धमकी हो तो धारा 351 (आपराधिक अभित्रास, पुरानी 506) भी जुड़ सकती है। निजी तस्वीरें या अश्लील सामग्री ऑनलाइन फैलाने पर IT Act धारा 66E / 67 भी लग सकती है।

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शिकायत कैसे करें

किसी भी थाने में जाएँ — संज्ञेय अपराध की FIR दर्ज करना उसका कर्तव्य है, घटना कहीं भी हुई हो (BNSS धारा 173, ज़ीरो FIR), या जहाँ राज्य अनुमति देता है वहाँ ई-FIR / ऑनलाइन शिकायत करें और तीन दिन में हस्ताक्षर करें। धारा 173(1) के पहले परंतुक के अनुसार जब कोई महिला BNS धारा 74–79 (और यौन अपराधों) की सूचना देती है, तो उसे महिला पुलिस अधिकारी या किसी महिला अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाना है। अगर उसे अस्थायी या स्थायी दिव्यांगता है, तो सूचना उसके घर या उसकी चुनी जगह पर दर्ज होगी, वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, और मजिस्ट्रेट उसका बयान दर्ज करेगा। आपको FIR की कॉपी मुफ़्त पाने का अधिकार है (धारा 173(2))। कई थानों में महिला हेल्प डेस्क है।

कौन से सबूत रखें

जितनी जल्दी हो सके, जो हुआ उसे लिख लें — तारीख़, समय, जगह, कहे गए शब्द, गवाह। प्रोफ़ाइल / नंबर दिखते हुए स्क्रीनशॉट, कॉल लॉग, संदेश, ईमेल और पोस्ट के लिंक सँभालें; परेशान करने वाली चैट भी डिलीट न करें। आस-पास के CCTV कैमरे (दुकान, मेट्रो, सोसाइटी गेट) नोट करें और पुलिस को जल्दी बताएँ, क्योंकि फ़ुटेज अक्सर कुछ दिनों में मिट जाती है। ऑनलाइन स्टॉकिंग या अश्लील संदेशों के लिए cybercrime.gov.in पर शिकायत करें (इसमें महिला / बच्चे की अलग श्रेणी है) और प्लेटफ़ॉर्म पर रिपोर्ट करें, पर पहले अपनी कॉपी रख लें।

FIR के बाद क्या होता है

पुलिस जाँच करती है, बयान लेती है, CCTV और फ़ोन रिकॉर्ड जुटाती है, और अपराध के अनुसार आरोपी को गिरफ़्तार कर सकती है। आप BNSS धारा 183 (पुरानी CrPC 164) में मजिस्ट्रेट के सामने भी बयान दर्ज करा सकती हैं, जिसका मुक़दमे में वज़न होता है। जाँच अधिकारी से अपडेट माँगें; पुलिस FIR न लिखे या कार्रवाई न करे तो SP / DCP को लिखें (धारा 173(4)) और फिर मजिस्ट्रेट के पास जाएँ (धारा 175(3))। केस वापस लेने की धमकी मिले तो उसकी लिखित शिकायत करें — वह अलग अपराध है।

दूसरे मंच जो मदद कर सकते हैं

कार्यस्थल पर POSH अधिनियम, 2013 के तहत आंतरिक समिति (या ज़िले की स्थानीय समिति) में भी शिकायत हो सकती है — पुलिस शिकायत के साथ या उसकी जगह। राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग ऑनलाइन शिकायतें लेते हैं। स्कूल-कॉलेज में संस्था की समिति और एंटी-रैगिंग व्यवस्था कार्रवाई कर सकती है। पीड़िता 18 साल से कम हो तो POCSO अधिनियम लागू होता है — पुलिस और बाल कल्याण समिति की विशेष ज़िम्मेदारियाँ हैं।

निजता, सहायता और मुआवज़ा

आप पुलिस और अदालत से अपनी पहचान गोपनीय रखने को कह सकती हैं; यौन अपराधों में BNS धारा 72 पीड़िता की पहचान छापने पर रोक लगाती है। ज़िलों में वन-स्टॉप सेंटर (सखी) परामर्श, चिकित्सा और कानूनी सहायता देते हैं। पीड़िता BNSS धारा 396 (पुरानी 357A) में पीड़ित मुआवज़े के लिए ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन कर सकती है, और NALSA हेल्पलाइन 15100 कानूनी सहायता के बारे में बताती है।

ये ग़लतियाँ न करें

अकेले उस व्यक्ति से भिड़ने या उसका नाम लेकर सार्वजनिक आरोप पोस्ट करने से बचें — इससे आपकी सुरक्षा पर असर पड़ सकता है और मानहानि का उल्टा केस बन सकता है। दबाव में फ़ोन पर ‘समझौता’ न करें; धारा 74 जैसे गंभीर अपराधों में निजी समझौता नहीं हो सकता। बेवजह देर न करें: जल्दी की गई शिकायत मज़बूत होती है, हालाँकि ठोस कारण से हुई देरी से केस ख़त्म नहीं होता।

अधिवक्ता कैसे मदद कर सकता है

हम शिकायत दाखिल नहीं करते और पुलिस, आरोपी या किसी और से संपर्क नहीं करते। ख़तरे में हों तो पहले 112 या 181 पर कॉल करें। अधिवक्ता एक सुविधा प्लेटफ़ॉर्म है, लॉ फर्म नहीं। हम केस दाखिल नहीं करते, किसी प्राधिकरण के सामने उपस्थित नहीं होते, और किसी परिणाम का वादा नहीं करते। स्वतंत्र अधिवक्ता से सामान्य मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ पर अपनी स्थिति लिखें, या तथ्यों और काग़ज़ों को व्यवस्थित करने के लिए AI सहायक से शुरू करें। केवल शैक्षिक जानकारी — औपचारिक कानूनी सलाह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IPC 354 की जगह छेड़छाड़ की नई धारा कौन सी है?
1 जुलाई 2024 से IPC 354 की जगह BNS धारा 74 (महिला की लज्जा भंग करने के लिए हमला या बल प्रयोग) है। यौन उत्पीड़न धारा 75 (पुरानी 354A), पीछा करना धारा 78 (पुरानी 354D), और अपमानजनक शब्द या इशारे धारा 79 (पुरानी 509) हैं।
क्या Instagram या WhatsApp पर पीछा करना अपराध है?
हाँ। BNS धारा 78 में महिला के इंटरनेट, ईमेल या इलेक्ट्रॉनिक संचार पर नज़र रखना और साफ़ मना करने के बावजूद बार-बार संपर्क करना शामिल है। cybercrime.gov.in और पुलिस में शिकायत करें, स्क्रीनशॉट रखें।
क्या महिला ज़ोर दे सकती है कि उसकी शिकायत महिला अधिकारी दर्ज करे?
हाँ। BNS धारा 74–79 और यौन अपराधों में BNSS धारा 173(1) कहती है कि महिला की सूचना महिला पुलिस अधिकारी या किसी महिला अधिकारी द्वारा दर्ज की जाए।
क्या छेड़छाड़ की FIR किसी भी थाने में हो सकती है?
हाँ। BNSS धारा 173 (ज़ीरो FIR) में कोई भी थाना संज्ञेय अपराध की FIR दर्ज करके सही थाने को भेजेगा। कई राज्यों में ई-FIR भी है, जिस पर तीन दिन में हस्ताक्षर करने होते हैं।
पीछा करने (स्टॉकिंग) की सज़ा क्या है?
BNS धारा 78 में पहली बार दोषी होने पर 3 साल तक की क़ैद और जुर्माना, और दूसरी या बाद की बार 5 साल तक की क़ैद और जुर्माना।
क्या छेड़छाड़ के केस में समझौता हो सकता है?
BNS धारा 74 जैसे गंभीर अपराधों में निजी समझौता नहीं हो सकता; सीमित मामलों में केवल हाई कोर्ट केस रद्द कर सकता है। केस वापस लेने के दबाव में न आएँ — धमकी की लिखित शिकायत करें।
पुलिस के अलावा और कहाँ शिकायत कर सकते हैं?
POSH अधिनियम के तहत कार्यस्थल की आंतरिक समिति, राष्ट्रीय / राज्य महिला आयोग, स्कूल या कॉलेज की समिति, और ऑनलाइन उत्पीड़न के लिए cybercrime.gov.in। हेल्पलाइन: 112, 181, और बच्चों के लिए 1098।

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