Skip to content
Adhiwakta logo — scales of justice in a shield cradled by a handAdhiwakta
Ask

This guide is written in Hindi. Read it in English →

दान-पत्र (गिफ़्ट डीड) कैसे रद्द करें — क्या माता-पिता बेटे / बेटी को दी गई संपत्ति वापस ले सकते हैं? TPA धारा 126, वरिष्ठ नागरिक अधिनियम धारा 23 (उर्मिला दीक्षित 2025), रद्दीकरण का दीवानी वाद (परिसीमा अनुच्छेद 59), एकतरफ़ा रद्दीकरण विलेख क्यों नहीं चलता, और मुस्लिम हिबा (2026)

माता-पिता और संतान के लिए सरल गाइड: रजिस्टर्ड दान-पत्र (गिफ़्ट डीड / हिबा) रद्द करना या चुनौती देना — पूरा हो चुका दान आम तौर पर मर्ज़ी से वापस क्यों नहीं होता, संपत्ति अंतरण अधिनियम धारा 126 के सीमित आधार, देखभाल की शर्त पर दिया गया दान और संतान के देखभाल बंद करने पर वरिष्ठ नागरिक अधिनियम धारा 23 का रास्ता, धोखा या अनुचित प्रभाव पर रद्दीकरण का दीवानी वाद, समय-सीमा, और संतान जवाब में क्या कह सकती है। केवल शैक्षिक जानकारी — कानूनी सलाह नहीं। अधिवक्ता विलेख नहीं बनाता, अधिकरण आवेदन या वाद दाखिल नहीं करता और किसी की ओर से पेश नहीं होता।

Send your question on WhatsApp

WhatsApp opens with your question already written. You just tap send.

दान पूरा हो जाए तो आम तौर पर अंतिम होता है

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 के अनुसार दान बिना प्रतिफल के स्वेच्छा से किया गया अंतरण है, जिसे दानग्रहीता दाता के जीवनकाल में स्वीकार करे (धारा 122); अचल संपत्ति का दान दाता के हस्ताक्षर और दो गवाहों वाले रजिस्टर्ड दस्तावेज़ से होना चाहिए (धारा 123)। वैध रूप से हुआ और स्वीकार किया गया दान दाता बस मन बदलकर वापस नहीं ले सकता। एन. ताजुद्दीन बनाम तमिलनाडु खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (24 अक्टूबर 2024) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस स्वीकृत दान-पत्र में रद्द करने का अधिकार सुरक्षित नहीं रखा गया, वह रद्द नहीं हो सकता, और बाद का रद्दीकरण विलेख शून्य था।

रद्द करने के सीमित आधार — TPA धारा 126

धारा 126 केवल दो स्थितियों में दान निलंबित या रद्द करने देती है: (1) दाता और दानग्रहीता ने तय किया हो कि किसी निश्चित घटना पर, जो केवल दाता की इच्छा पर निर्भर न हो, दान रद्द होगा — केवल दाता की मर्ज़ी पर रद्द होने वाला दान उस हद तक शून्य है; और (2) वह कोई भी आधार जिस पर, अगर यह अनुबंध होता, तो रद्द हो सकता — जैसे धोखा, ज़बरदस्ती, अनुचित प्रभाव या मिथ्या निरूपण (लेकिन प्रतिफल न होना आधार नहीं)। दान-पत्र ध्यान से पढ़ें: क्या उसमें कोई लिखित शर्त है, जैसे कि दानग्रहीता दाता की देखभाल करेगा?

Is your situation a little different? Send your question on WhatsApp.

Write in Hindi or English · general guidance, not legal advice

Ask on WhatsApp

एकतरफ़ा ‘रद्दीकरण विलेख’ आम तौर पर नहीं चलता

कई परिवार दानग्रहीता की सहमति के बिना नया ‘रद्दीकरण विलेख’ रजिस्टर कराने की कोशिश करते हैं। थोटा गंगा लक्ष्मी बनाम आंध्र प्रदेश सरकार (2010) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रजिस्टर्ड बैनामा एकतरफ़ा रद्दीकरण विलेख से रद्द नहीं हो सकता — रास्ता कोर्ट है। आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट (2024) सहित हाई कोर्टों ने यही सिद्धांत रजिस्टर्ड दान-पत्रों पर लागू किया है। दाता और दानग्रहीता की आपसी सहमति से रद्दीकरण, या कोर्ट की डिक्री / अधिकरण का आदेश, सुरक्षित रास्ता है; उप-पंजीयक क्या स्वीकार कर सकता है, इस पर राज्यों के पंजीयन नियम अलग हैं।

वरिष्ठ नागरिक अधिनियम धारा 23 — जब संतान देखभाल बंद कर दे

अगर किसी वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष या अधिक) ने अधिनियम लागू होने के बाद इस शर्त पर दान या अन्य तरीक़े से संपत्ति दी कि प्राप्तकर्ता बुनियादी सुविधाएँ और शारीरिक ज़रूरतें पूरी करेगा, और प्राप्तकर्ता ऐसा करने से इनकार करे या चूक जाए, तो अंतरण धोखे, ज़बरदस्ती या अनुचित प्रभाव से हुआ माना जाता है और वरिष्ठ नागरिक के विकल्प पर भरण-पोषण अधिकरण उसे शून्य घोषित कर सकता है (माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 धारा 23(1))। आवेदन ज़िले के अधिकरण में जाता है, जिसकी अध्यक्षता आम तौर पर SDM करते हैं। सुदेश छिकारा (2022) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शर्त साबित होनी चाहिए; उर्मिला दीक्षित बनाम सुनील शरण दीक्षित (2 जनवरी 2025) में कोर्ट ने लाभकारी दृष्टि अपनाई, देखभाल का वादा करके मुकरने वाले बेटे के पक्ष का दान-पत्र रद्द किया, और कहा कि अधिकरण कब्ज़ा भी वापस दिला सकता है।

रद्दीकरण का दीवानी वाद — धोखा, अनुचित प्रभाव, जालसाज़ी

जहाँ दान धोखे, दबाव, मिथ्या निरूपण या जाली दस्तख़त से लिया गया हो, वहाँ दाता (या कुछ मामलों में वारिस) दस्तावेज़ रद्द करने का दीवानी वाद (विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम धारा 31) घोषणा और निषेधाज्ञा के साथ दाखिल कर सकता है। परिसीमा अधिनियम का अनुच्छेद 59 आम तौर पर रद्दीकरण का हक़ देने वाले तथ्य पहली बार पता चलने से 3 वर्ष देता है। जहाँ बुज़ुर्ग या अनपढ़ दाता दानग्रहीता पर निर्भर था, वहाँ कोर्ट बारीकी से देखता है कि क्या दाता दस्तावेज़ समझता था और उसे स्वतंत्र सलाह मिली थी। वाद लंबित रहते आगे बिक्री रोकने के लिए अस्थायी निषेधाज्ञा (CPC आदेश 39) माँगी जा सकती है।

मुस्लिम दान (हिबा) अलग है

मुस्लिम पर्सनल लॉ में हिबा के लिए घोषणा, स्वीकृति और कब्ज़ा सौंपना ज़रूरी है, और यह मौखिक भी हो सकता है। कब्ज़ा सौंपने से पहले इसे वापस लिया जा सकता है; सौंपने के बाद वापसी के लिए आम तौर पर दानग्रहीता की सहमति या कोर्ट की डिक्री चाहिए, और कुछ दान — जैसे पति / पत्नी या निषिद्ध डिग्री के क़रीबी रक्त-संबंधी को — अपरिवर्तनीय माने जाते हैं। अगर रजिस्टर्ड विलेख इस्तेमाल हुआ है, तो TPA और पंजीयन नियम भी मायने रखते हैं। पर्सनल लॉ के मामले देखने वाले अधिवक्ता से तथ्य जाँच लें।

अगर आप दानग्रहीता (बेटा / बेटी) हैं और नोटिस मिला है

मूल दान-पत्र, दाख़िल-ख़ारिज की प्रविष्टियाँ, टैक्स रसीदें और कब्ज़े का सबूत रखें; अधिकरण के किसी भी नोटिस का लिखित जवाब दें और तारीख़ पर पेश हों; अगर धारा 23 की शर्त का आरोप है तो दी गई देखभाल दिखाएँ (बिल, इलाज का ख़र्च, रहने की व्यवस्था); और अगर दान-पत्र में कोई शर्त नहीं है और प्रेम-स्नेह से दिया गया था, तो यह बताएँ (सुदेश छिकारा)। क़ानून अपने हाथ में न लें और माता-पिता को घर से न निकालें — वरिष्ठ नागरिक को बेदख़ल करने या परेशान करने पर अलग कार्यवाही हो सकती है, और दान बना रहे तब भी भरण-पोषण का आदेश हो सकता है।

माता-पिता के लिए व्यावहारिक कदम

1) उप-पंजीयक कार्यालय से रजिस्टर्ड दान-पत्र की प्रमाणित प्रति लें। 2) देखभाल की कोई लिखित शर्त, और कोई अलग वादा / वचन-पत्र नोट करें। 3) उपेक्षा या दुर्व्यवहार के सबूत जुटाएँ (मैसेज, मेडिकल रिकॉर्ड, शिकायतें, गवाह)। 4) रास्ता चुनें — अधिकरण में धारा 23 का आवेदन, दीवानी वाद, या दानग्रहीता सहमत हो तो आपसी रद्दीकरण विलेख। 5) हिंसा हो तो स्थानीय पुलिस / वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन (14567, एल्डरलाइन) से मदद लें। 6) बची हुई संपत्ति के लिए वसीयत पर विचार करें ताकि विवाद दोबारा न हो।

अधिवक्ता कैसे मदद कर सकता है

हम विलेख बनाते या रजिस्टर नहीं कराते, अधिकरण आवेदन या दीवानी वाद दाखिल नहीं करते, और किसी प्राधिकरण के सामने पेश नहीं होते। अधिवक्ता एक सुविधा प्लेटफ़ॉर्म है, लॉ फर्म नहीं। हम केस दाखिल नहीं करते, किसी प्राधिकरण के सामने उपस्थित नहीं होते, और किसी परिणाम का वादा नहीं करते। स्वतंत्र अधिवक्ता से सामान्य मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ पर अपनी स्थिति लिखें, या तथ्यों और काग़ज़ों को व्यवस्थित करने के लिए AI सहायक से शुरू करें। केवल शैक्षिक जानकारी — औपचारिक कानूनी सलाह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या माता-पिता बेटे को किया गया दान-पत्र रद्द कर सकते हैं?
मर्ज़ी से नहीं। पूरा और स्वीकार हो चुका दान केवल TPA धारा 126 के आधारों (तय शर्त या धोखा / अनुचित प्रभाव जैसे आधार) पर रद्द हो सकता है, या अगर दान देखभाल की शर्त पर था और बेटे ने देखभाल नहीं की, तो वरिष्ठ नागरिक अधिनियम धारा 23 में भरण-पोषण अधिकरण उसे शून्य घोषित कर सकता है।
क्या मैं उप-पंजीयक कार्यालय में रद्दीकरण विलेख रजिस्टर करा सकता हूँ?
एकतरफ़ा रद्दीकरण विलेख आम तौर पर वैध नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने थोटा गंगा लक्ष्मी (2010) में कहा कि रद्दीकरण के लिए कोर्ट का रास्ता चाहिए, और हाई कोर्टों ने इसे दान-पत्रों पर भी लागू किया है। दानग्रहीता की सहमति से आपसी रद्दीकरण या कोर्ट / अधिकरण का आदेश सुरक्षित रास्ता है।
उर्मिला दीक्षित (2025) में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिक अधिनियम धारा 23 के तहत माँ का बेटे के पक्ष में किया दान-पत्र रद्द किया क्योंकि दान देखभाल के वादे से जुड़ा था जो पूरा नहीं हुआ, अधिनियम की लाभकारी व्याख्या की, और कहा कि अधिकरण कब्ज़ा भी वापस दिला सकता है।
दान-पत्र को चुनौती देने की समय-सीमा क्या है?
दस्तावेज़ रद्द करने के दीवानी वाद के लिए परिसीमा अधिनियम का अनुच्छेद 59 आम तौर पर तथ्य पहली बार पता चलने से 3 वर्ष देता है। तारीख़ें जल्दी जँचवा लें।
क्या दान-पत्र में देखभाल की शर्त लिखी होनी ज़रूरी है?
धारा 23 के लिए अंतरण बुनियादी सुविधाओं और ज़रूरतों की शर्त पर होना चाहिए, और वह शर्त साबित होनी चाहिए (सुदेश छिकारा 2022)। दान-पत्र या अलग दस्तावेज़ में लिखी हो तो बहुत मदद मिलती है; नहीं तो अधिकरण सबूत देखता है।
क्या मुस्लिम हिबा वापस लिया जा सकता है?
कब्ज़ा सौंपने से पहले हाँ। सौंपने के बाद आम तौर पर केवल दानग्रहीता की सहमति या कोर्ट की डिक्री से, और कुछ दान, जैसे पति / पत्नी या क़रीबी रक्त-संबंधी को, अपरिवर्तनीय माने जाते हैं।

Share Adhiwakta with someone who needs it

Send this page on WhatsApp — legal information in Hindi & English.

Ask on WhatsAppForm