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दहेज उत्पीड़न की शिकायत कैसे करें — हेल्पलाइन, BNS 85/86, स्त्रीधन

दहेज माँग या उत्पीड़न हो तो क्या करें: आपात हेल्पलाइन (112, 181, NCW 14490), दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961, BNS धारा 85–86 (पुरानी IPC 498A) में क्रूरता, BNS धारा 80 (पुरानी 304B) में दहेज मृत्यु, घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 में संरक्षण आदेश और स्त्रीधन वापसी, सबूत कैसे रखें, और परिवार कल्याण समिति पर 2025 का सुप्रीम कोर्ट फ़ैसला। केवल शैक्षिक — कानूनी सलाह नहीं।

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अभी ख़तरे में हैं तो

112 (पुलिस/आपात), महिला हेल्पलाइन 181 (24x7, ज़्यादातर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में) या राष्ट्रीय महिला आयोग हेल्पलाइन 14490 पर कॉल करें। सुरक्षित जगह जाएँ — रिश्तेदार का घर, वन स्टॉप सेंटर (सखी) या आश्रय गृह। फ़ोन, पहचान पत्र और कुछ पैसे साथ रखें। घरेलू हिंसा पर हमारे आपात पेज में पहले घंटे के कदम हैं।

दहेज किसे माना जाता है

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 2 के अनुसार विवाह के संबंध में — पहले, विवाह के समय या बाद में कभी भी — प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दी गई या देने पर सहमत कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति दहेज है। दहेज देना, लेना या उसमें मदद करना कम से कम 5 वर्ष कारावास और कम से कम ₹15,000 या दहेज के मूल्य (जो अधिक हो) के जुर्माने से दंडनीय है (धारा 3)। दहेज माँगना 6 महीने से 2 वर्ष तक और ₹10,000 तक जुर्माने से दंडनीय है (धारा 4)। बिना माँग के स्वेच्छा से दिए उपहार, जो अधिनियम के अनुसार सूचीबद्ध हों, दहेज नहीं हैं। मिला दहेज महिला को सौंपना होता है (धारा 6)। राज्य दहेज प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त करते हैं (धारा 8B)।

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BNS में क्रूरता और दहेज मृत्यु

पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता — संपत्ति की अवैध माँग पूरी कराने के लिए उत्पीड़न, या ऐसा आचरण जिससे महिला आत्महत्या को मजबूर हो या गंभीर चोट पहुँचे — भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85–86 (पुरानी IPC धारा 498A) के तहत 3 वर्ष तक और जुर्माने से दंडनीय है। दहेज मृत्यु (विवाह के सात वर्ष के भीतर असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु, दहेज के लिए क्रूरता के तुरंत बाद) BNS धारा 80 (पुरानी धारा 304B) में कम से कम 7 वर्ष से आजीवन कारावास तक दंडनीय है, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 क्रूरता करने वाले के विरुद्ध उपधारणा बनाता है (धारा 118, पुराना साक्ष्य अधिनियम धारा 113B)।

दीवानी सुरक्षा: घरेलू हिंसा अधिनियम और स्त्रीधन

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत महिला सीधे या संरक्षण अधिकारी के माध्यम से मजिस्ट्रेट से संरक्षण आदेश, निवास आदेश, आर्थिक राहत, बच्चों की अभिरक्षा और मुआवज़ा माँग सकती है। अधिनियम की घरेलू हिंसा की परिभाषा (धारा 3) में अवैध दहेज माँग के लिए उत्पीड़न स्पष्ट रूप से शामिल है। स्त्रीधन — महिला को दिए गहने, उपहार और संपत्ति — उसी का है; मजिस्ट्रेट इसे लौटाने का निर्देश दे सकते हैं (धारा 19(8)), और इसे रोकना आपराधिक न्यासभंग भी हो सकता है (BNS धारा 316, पुरानी IPC धारा 406)। हमारी घरेलू हिंसा संरक्षण आदेश गाइड देखें।

शिकायत करना

आप किसी भी थाने में FIR दर्ज करा सकती हैं (BNSS धारा 173 के तहत ज़ीरो FIR), महिला अपराध प्रकोष्ठ (CAW सेल) जा सकती हैं, या राज्य महिला आयोग या NCW में शिकायत कर सकती हैं। तारीखें, की गई माँगें, किसने कीं और क्या हुआ, लिखकर रखें। शिवांगी बंसल बनाम साहिब बंसल (जुलाई 2025) में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिशानिर्देशों का समर्थन किया, जिनके तहत कई 498A-प्रकार की शिकायतों में लगभग दो महीने तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती जबकि परिवार कल्याण समिति मामला देखती है — अमल राज्य-वार अलग है, और गंभीर चोट या तत्काल ख़तरे में यह लागू नहीं।

कौन-से सबूत रखें

माँगों से जुड़े संदेश, कॉल रिकॉर्डिंग और ईमेल; फ़ोटो और बिल के साथ उपहारों व स्त्रीधन की सूची; शादी के ख़र्च की रसीदें; किसी चोट की मेडिकल रिपोर्ट; गवाहों के नाम; पहले की शिकायतें या पंचायत/मध्यस्थता रिकॉर्ड; ससुराल वालों को किए बैंक ट्रांसफ़र। प्रतियाँ किसी भरोसेमंद व्यक्ति के पास या क्लाउड में रखें।

कानून का दुरुपयोग न करें

शिकायत सच्ची होनी चाहिए। अदालतों ने दूर के रिश्तेदारों पर बढ़ा-चढ़ाकर या सामूहिक आरोपों के ख़िलाफ़ चेताया है, और झूठा आरोप स्वयं अपराध है (BNS धारा 248)। उन्हीं तथ्यों पर टिकें जिन्हें आप साबित कर सकें।

अधिवक्ता कैसे मदद कर सकता है

हम आपात सेवा नहीं हैं और शिकायत दर्ज नहीं करते। ख़तरे में 112 या 181 पर कॉल करें। अधिवक्ता (Adhiwakta) एक सुविधा मंच है, लॉ फ़र्म नहीं। हम केस दाखिल नहीं करते, किसी प्राधिकरण के सामने पेश नहीं होते और किसी परिणाम का वादा नहीं करते। अपनी स्थिति बताकर स्वतंत्र अधिवक्ता से सामान्य मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ का उपयोग करें, या तथ्य और कागज़ व्यवस्थित करने के लिए AI सहायक से शुरू करें। केवल शैक्षिक — औपचारिक कानूनी सलाह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दहेज माँगने की सज़ा क्या है?
दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 4 के तहत दहेज माँगना 6 महीने से 2 वर्ष तक कारावास और ₹10,000 तक जुर्माने से दंडनीय है। दहेज देना या लेना कम से कम 5 वर्ष और कम से कम ₹15,000 या दहेज मूल्य के जुर्माने से दंडनीय है (धारा 3)।
IPC धारा 498A की जगह क्या आया?
1 जुलाई 2024 से पति या रिश्तेदारों की क्रूरता भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 और 86 में है — 3 वर्ष तक कारावास और जुर्माना। दहेज मृत्यु BNS धारा 80 (पुरानी IPC 304B) है।
दहेज उत्पीड़न में किस हेल्पलाइन पर कॉल करें?
आपात में 112, महिला हेल्पलाइन 181, या NCW हेल्पलाइन 14490। वन स्टॉप सेंटर, पुलिस का महिला अपराध प्रकोष्ठ, या घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत संरक्षण अधिकारी से भी संपर्क कर सकती हैं।

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