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माता-पिता भरण-पोषण अधिनियम 2007 — बुज़ुर्ग माता-पिता का गुज़ारा भत्ता कैसे माँगें
बुज़ुर्ग माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 या धारा 144 BNSS (पुरानी धारा 125 CrPC) के तहत बच्चों या रिश्तेदारों से मासिक भरण-पोषण कैसे माँगें; धारा 23 के तहत संपत्ति हस्तांतरण रद्द कराना; एल्डरलाइन 14567। केवल शैक्षिक जानकारी।
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कौन दावा कर सकता है, और किससे
माता या पिता (जैविक, दत्तक या सौतेले — वरिष्ठ नागरिक होना ज़रूरी नहीं) और 60 वर्ष या अधिक आयु का कोई भी वरिष्ठ नागरिक, जो अपनी कमाई या संपत्ति से गुज़ारा नहीं कर पाता, भरण-पोषण माँग सकता है (2007 अधिनियम की धारा 4)। माता-पिता अपने वयस्क बच्चों और पोते-पोतियों से दावा करते हैं। निःसंतान वरिष्ठ नागरिक उस रिश्तेदार से दावा कर सकते हैं जिसके पास उनकी संपत्ति है या जो उसका वारिस होगा। ‘भरण-पोषण’ में भोजन, कपड़े, आवास और चिकित्सा देखभाल व इलाज शामिल है।
कहाँ आवेदन करें
भरण-पोषण ट्रिब्यूनल में — आमतौर पर उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) स्तर पर — उस ज़िले में जहाँ माता-पिता रहते हैं या पिछली बार रहते थे, या जहाँ बच्चे रहते हैं (धारा 6)। वरिष्ठ नागरिक खुद, या अपने अधिकृत व्यक्ति या पंजीकृत संस्था के ज़रिए आवेदन कर सकते हैं; ट्रिब्यूनल स्वतः भी संज्ञान ले सकता है (धारा 5)। कई राज्यों में फ़ॉर्म SDM कार्यालय या ज़िला समाज कल्याण कार्यालय से मिलता है।
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कितना और कितनी जल्दी
ट्रिब्यूनल अधिकतम ₹10,000 प्रति माह तक का आदेश दे सकता है (धारा 9(2)); यह सीमा हटाने वाला 2019 का संशोधन विधेयक लैप्स हो गया और कानून नहीं बना। मामला लंबित रहते अंतरिम भरण-पोषण दिया जा सकता है। कानून ट्रिब्यूनल से नोटिस तामील के 90 दिन में फ़ैसला चाहता है, असाधारण स्थिति में एक बार 30 दिन बढ़ सकता है (धारा 5(4))। आदेश न मानने पर ट्रिब्यूनल वारंट जारी कर हर बकाया महीने के लिए एक महीने तक की क़ैद का आदेश दे सकता है (धारा 5(8))।
ट्रिब्यूनल में वकील नहीं; अपील 60 दिन में
धारा 17 के अनुसार ट्रिब्यूनल या अपीलीय ट्रिब्यूनल में पक्षकारों का प्रतिनिधित्व वकील नहीं कर सकते — प्रक्रिया सरल रखी गई है। कागज़ तैयार करने के लिए सलाह फिर भी ले सकते हैं। ट्रिब्यूनल पहले सुलह अधिकारी के पास भेज सकता है। आदेश के 60 दिन के भीतर अपीलीय ट्रिब्यूनल (आमतौर पर ज़िला मजिस्ट्रेट स्तर) में अपील होती है (धारा 16)।
बच्चों को दी संपत्ति, फिर देखभाल नहीं (धारा 23)
अगर वरिष्ठ नागरिक ने इस शर्त पर उपहार या अन्य तरीक़े से संपत्ति दी कि पाने वाला बुनियादी सुविधाएँ और ज़रूरतें पूरी करेगा, और वह ऐसा नहीं करता, तो वह हस्तांतरण धोखे या अनुचित प्रभाव से किया माना जाता है और ट्रिब्यूनल उसे शून्य घोषित कर सकता है। गिफ़्ट/हस्तांतरण डीड और देखभाल के लिखित या रिकॉर्डेड वादे संभालें। देखभाल के ज़िम्मेदार व्यक्ति द्वारा वरिष्ठ नागरिक को छोड़ देना भी अपराध है (धारा 24 — 3 महीने तक, या ₹5,000 तक जुर्माना, या दोनों)।
दूसरा रास्ता: धारा 144 BNSS (पुरानी 125 CrPC)
गुज़ारा न कर पाने वाले माता-पिता धारा 144 BNSS (पुरानी धारा 125 CrPC) के तहत मजिस्ट्रेट को भी आवेदन कर सकते हैं, जहाँ कोई तय ऊपरी सीमा नहीं है। हिंदू माता-पिता हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 20 का सहारा भी ले सकते हैं। 2007 अधिनियम की धारा 12 के अनुसार एक ही दावे के लिए ट्रिब्यूनल या धारा 144 में से कोई एक रास्ता चुनना होता है, दोनों नहीं।
आमतौर पर कौन से कागज़
आयु प्रमाण, रिश्ते का प्रमाण (जन्म प्रमाणपत्र, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर), बच्चों की आय और संपत्ति का विवरण, अपनी आय और मासिक खर्च, मेडिकल बिल, और कोई संपत्ति हस्तांतरण डीड। उपेक्षा या उत्पीड़न की छोटी तारीखवार सूची बनाएँ।
हेल्पलाइन
एल्डरलाइन — वरिष्ठ नागरिकों की राष्ट्रीय हेल्पलाइन — 14567 है। ख़तरे में 112 पर कॉल करें। 2007 अधिनियम राज्य सरकारों से वरिष्ठ नागरिकों के जीवन और संपत्ति की रक्षा की अपेक्षा करता है (धारा 22), इसलिए स्थानीय पुलिस और ज़िला कल्याण कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।
अधिवक्ता (Adhiwakta) कैसे मदद कर सकता है
अधिवक्ता सुविधा मंच है, लॉ फर्म नहीं, और किसी आदेश या राशि की गारंटी नहीं देता। स्वतंत्र अधिवक्ता से सामान्य मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ (परिवार) का उपयोग करें, या पहले AI सहायक से तथ्य व्यवस्थित करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- माता-पिता को कितना भरण-पोषण मिल सकता है?
- 2007 अधिनियम की धारा 9(2) के तहत ट्रिब्यूनल अधिकतम ₹10,000 प्रति माह दे सकता है। धारा 144 BNSS में कोई तय सीमा नहीं, पर एक ही दावे के लिए दोनों रास्ते नहीं अपना सकते।
- क्या बच्चों को दी संपत्ति वापस हो सकती है?
- धारा 23 के तहत अगर संपत्ति देखभाल की शर्त पर दी गई और शर्त पूरी नहीं हुई, तो ट्रिब्यूनल हस्तांतरण शून्य घोषित कर सकता है।
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