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मृत व्यक्ति का बैंक खाता, FD या लॉकर — भारत में क्लेम कैसे करें: नॉमिनी, संयुक्त खाताधारक या क़ानूनी वारिस, RBI के 2025 नियम (15 दिन में निपटारा, देरी पर मुआवज़ा, ₹15 लाख तक बिना उत्तराधिकार प्रमाण पत्र आसान क्लेम), 1 नवंबर 2025 से चार नॉमिनी तक (2026)
किसी की मृत्यु के बाद परिवार के लिए आसान, चरण-दर-चरण गाइड: बचत खाते, FD या RD का पैसा और बैंक लॉकर का सामान जीवित खाताधारक, नॉमिनी या क़ानूनी वारिसों को कैसे मिलता है, RBI के 2025 निर्देशों के तहत बैंक कौन से काग़ज़ माँग सकता है, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र कब चाहिए और कब नहीं, 15 दिन का नियम और देरी पर मुआवज़ा, और शिकायत कहाँ करें। केवल शैक्षिक जानकारी — कानूनी सलाह नहीं। अधिवक्ता आपकी ओर से क्लेम दाखिल नहीं करता और बैंक से संपर्क नहीं करता।
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पहले पता करें कि तीन में से कौन सी स्थिति है
शाखा से (लिखित में) पूछें कि खाता या लॉकर किस तरह का है। (1) ‘either or survivor’ जैसी उत्तरजीविता शर्त वाला संयुक्त खाता — जीवित खाताधारक आम तौर पर खाता चला सकता है या रक़म ले सकता है। (2) पंजीकृत नॉमिनी — बैंक नॉमिनी को भुगतान करता है, या लॉकर तक पहुँच देता है। (3) न नॉमिनी, न उत्तरजीविता — क़ानूनी वारिस क्लेम करते हैं। बैंकिंग विनियमन अधिनियम में संशोधन के बाद 1 नवंबर 2025 से जमाकर्ता चार नॉमिनी तक रख सकता है — एक साथ तय प्रतिशत में, या क्रम से एक के बाद एक — जबकि लॉकर और सुरक्षित अभिरक्षा की वस्तुओं में केवल क्रमिक नॉमिनी की अनुमति है। ज़्यादातर बैंकों की वेबसाइट पर मृत ग्राहक क्लेम का पेज और फ़ॉर्म होते हैं।
जब नॉमिनी या जीवित खाताधारक हो
RBI (बैंकों के मृत ग्राहकों के दावों का निपटान) निर्देश, 2025 के अनुसार नॉमिनी या जीवित खाताधारक को भुगतान करते समय बैंक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, प्रशासन-पत्र या प्रोबेट पर ज़ोर नहीं देगा, और क्षतिपूर्ति या ज़मानत बॉन्ड नहीं माँगेगा। आम तौर पर क्लेम फ़ॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र और दावेदार का पहचान व पता प्रमाण काफ़ी है। याद रखें कि नॉमिनी पैसा प्राप्त करता है पर अपने-आप उसका अंतिम मालिक नहीं बनता — सुप्रीम कोर्ट ने राम चंदर तलवार बनाम देवेंदर कुमार तलवार (2010) में कहा कि क़ानूनी वारिसों के उत्तराधिकार क़ानून के अधिकार बने रहते हैं, इसलिए परिवार को वसीयत या पर्सनल लॉ के अनुसार बाँटना पड़ सकता है। हमारी नॉमिनी बनाम वारिस गाइड देखें।
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नॉमिनी नहीं — ₹15 लाख तक आसान प्रक्रिया
अगर नॉमिनी या उत्तरजीविता शर्त नहीं है, वसीयत नहीं है, वारिसों में विवाद नहीं है और भुगतान रोकने का कोई अदालती आदेश नहीं है, तो कुल रक़म एक सीमा से कम होने पर बैंक को आसान प्रक्रिया अपनानी होती है — ज़्यादातर बैंकों के लिए ₹15 लाख और सहकारी बैंकों के लिए ₹5 लाख (बैंक इससे ऊँची सीमा तय कर सकता है)। आम काग़ज़: दावेदार वारिसों द्वारा हस्ताक्षरित क्लेम फ़ॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, पहचान व पता प्रमाण, क्षतिपूर्ति बॉन्ड, दावा न करने वाले वारिसों का अनापत्ति / त्याग पत्र, और सक्षम प्राधिकारी का क़ानूनी वारिस प्रमाण पत्र या परिवार को जानने वाले किसी स्वतंत्र व्यक्ति की वारिसों के बारे में घोषणा। सीमा से कम रक़म पर तीसरे व्यक्ति की ज़मानत नहीं ली जानी चाहिए। सीमा से ऊपर बैंक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, धारा 372) या क़ानूनी वारिस प्रमाण पत्र / शपथ-पत्र और ज़मानत माँग सकता है। वसीयत हो तो बैंक प्रोबेट या अन्य प्रमाण के लिए अपनी प्रक्रिया अपना सकता है।
लॉकर और सुरक्षित अभिरक्षा की वस्तुएँ
नॉमिनी हो तो बैंक नॉमिनी को पहुँच देता है, और बैंक अधिकारियों व एक स्वतंत्र गवाह के सामने सामान की सूची (इन्वेंटरी) बनती है; नॉमिनी हस्ताक्षर कर सामान ले जाता है। नॉमिनी न हो तो क़ानूनी वारिस बैंक के माँगे काग़ज़ों के साथ आवेदन करते हैं, और उनके सामने इन्वेंटरी बनती है। 2025 के निर्देशों के तहत पूरे काग़ज़ मिलने के 15 कैलेंडर दिन में बैंक को लॉकर क्लेम पर कार्रवाई कर इन्वेंटरी की तारीख़ तय करने के लिए दावेदारों से संपर्क करना होता है। इन्वेंटरी सूची की प्रति रखें। परिवार में सहमति न हो तो किसी एक व्यक्ति को लॉकर ख़ाली न करने दें; सलाह लें।
15 दिन की समय-सीमा और देरी पर मुआवज़ा
सभी ज़रूरी काग़ज़ मिलने के 15 कैलेंडर दिन के भीतर बैंक को जमा राशि का क्लेम निपटाना होता है। न कर सके तो दावेदार को कारण बताने होते हैं। देरी बैंक की ग़लती से हो तो बैंक को देरी की अवधि के लिए रक़म पर कम से कम बैंक दर + 4% सालाना ब्याज के रूप में मुआवज़ा देना होता है; लॉकर या सुरक्षित अभिरक्षा के क्लेम में देरी के हर दिन ₹5,000। अपने काग़ज़ों की तारीख़ वाली पावती ज़रूर लें — उसी तारीख़ से 15 दिन गिने जाते हैं।
बैंक मना करे या देर करे — शिकायत कहाँ करें
पहले शाखा को, फिर बैंक के शिकायत निवारण या नोडल अधिकारी को क्लेम के काग़ज़ और पावती लगाकर लिखें। 30 दिन में जवाब न मिले या जवाब संतोषजनक न हो, तो RBI एकीकृत लोकपाल (cms.rbi.org.in) पर ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं। अगर खाता दस साल या उससे ज़्यादा से निष्क्रिय था, तो पैसा RBI के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता कोष में गया हो सकता है — RBI के UDGAM पोर्टल पर खोजें और फिर उसी बैंक से क्लेम करें। वारिसों के आपसी विवाद दीवानी अदालत में जाते हैं, लोकपाल के पास नहीं।
परिवार के लिए व्यावहारिक सुझाव
मृत्यु प्रमाण पत्र की कई प्रतियाँ लें। पासबुक, FD रसीदें, चेक बुक, लॉकर की चाबी और अनुबंध इकट्ठा करें। व्यक्ति के दूसरे बैंक, डाकघर योजनाएँ, बीमा, PF और पेंशन भी देखें। मृत्यु के बाद मृत व्यक्ति के ATM कार्ड, UPI या चेक से पैसा न निकालें — इससे विवाद और आपराधिक शिकायत तक हो सकती है। बाद के झगड़ों से बचने के लिए सभी वारिसों को लिखित में जानकारी देते रहें।
अधिवक्ता कैसे मदद कर सकता है
हम क्लेम दाखिल नहीं करते, बैंक या लोकपाल से संपर्क नहीं करते, और किसी परिणाम का वादा नहीं करते। अधिवक्ता एक सुविधा प्लेटफ़ॉर्म है, लॉ फर्म नहीं। हम केस दाखिल नहीं करते, किसी प्राधिकरण के सामने उपस्थित नहीं होते, और किसी परिणाम का वादा नहीं करते। स्वतंत्र अधिवक्ता से सामान्य मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ पर अपनी स्थिति लिखें, या तथ्यों और काग़ज़ों को व्यवस्थित करने के लिए AI सहायक से शुरू करें। केवल शैक्षिक जानकारी — औपचारिक कानूनी सलाह नहीं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- मृत व्यक्ति का बैंक का पैसा लेने के लिए क्या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र चाहिए?
- नॉमिनी या जीवित संयुक्त खाताधारक हो तो नहीं। नॉमिनी न हो तो RBI के 2025 निर्देशों के तहत, वसीयत और विवाद न होने पर, बैंक ₹15 लाख (सहकारी बैंक ₹5 लाख) तक आसान प्रक्रिया अपनाते हैं — क़ानूनी वारिस प्रमाण पत्र या वारिसों के बारे में घोषणा के साथ। इससे ऊपर उत्तराधिकार प्रमाण पत्र माँगा जा सकता है।
- बैंक मृत्यु क्लेम कितने दिन में निपटाता है?
- RBI के 2025 निर्देशों के अनुसार सभी काग़ज़ मिलने के 15 कैलेंडर दिन में। बैंक की वजह से देरी हो तो कम से कम बैंक दर + 4% सालाना ब्याज देना होता है; लॉकर क्लेम में देरी के हर दिन ₹5,000।
- क्या नॉमिनी पैसे का मालिक बन जाता है?
- बैंक नॉमिनी को भुगतान कर ज़िम्मेदारी से मुक्त हो जाता है, पर नॉमिनी अपने-आप मालिक नहीं बनता। वसीयत या उत्तराधिकार क़ानून के तहत क़ानूनी वारिसों के अधिकार बने रहते हैं (राम चंदर तलवार बनाम देवेंदर कुमार तलवार, 2010)।
- मृत व्यक्ति का बैंक लॉकर कैसे खुलवाएँ?
- नॉमिनी क्लेम फ़ॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र और पहचान पत्र देकर पहुँच पाता है; गवाह के सामने सामान की सूची बनती है। नॉमिनी न हो तो क़ानूनी वारिस बैंक के माँगे काग़ज़ों के साथ आवेदन करते हैं। बैंक को 15 दिन में क्लेम पर कार्रवाई कर इन्वेंटरी की तारीख़ तय करनी होती है।
- क्या अब बैंक खाते में एक से ज़्यादा नॉमिनी रख सकते हैं?
- हाँ। 1 नवंबर 2025 से जमा राशि के लिए चार नॉमिनी तक रख सकते हैं — एक साथ तय प्रतिशत में, या क्रम से एक के बाद एक। लॉकर और सुरक्षित अभिरक्षा की वस्तुओं में केवल क्रमिक नॉमिनी की अनुमति है।
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