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ऑनलाइन उपभोक्ता शिकायत कैसे करें — e-Jagriti (e-Daakhil) चरणवार गाइड

भारत में e-Jagriti पर ऑनलाइन उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने की चरणवार गाइड — 1 जनवरी 2025 से e-Jagriti ने e-Daakhil की जगह ली: कौन सा उपभोक्ता आयोग (₹50 लाख तक ज़िला, ₹50 लाख–₹2 करोड़ राज्य, ₹2 करोड़ से ऊपर राष्ट्रीय), ₹5 लाख तक कोई शुल्क नहीं, 2 साल की सीमा, दस्तावेज़, और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915। केवल शैक्षिक जानकारी।

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दाखिल करने से पहले

विक्रेता या सेवा प्रदाता से लिखित शिकायत करें और टिकट नंबर रखें। ई-कॉमर्स ख़रीद में प्लेटफ़ॉर्म के शिकायत अधिकारी को लिखें (उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के तहत ज़रूरी)। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन भी आज़माएँ — 1915 पर कॉल करें या NCH ऐप / consumerhelpline.gov.in — जो अक्सर मुक़दमे से पहले समाधान करा देती है। क़ानूनी नोटिस अनिवार्य नहीं, पर मदद कर सकता है (हमारा कानूनी नोटिस जनरेटर देखें)।

e-Daakhil अब e-Jagriti है

1 जनवरी 2025 को उपभोक्ता मामले विभाग ने e-Jagriti शुरू किया — एक ही प्लेटफ़ॉर्म जिसमें e-Daakhil, OCMS, CONFONET और NCDRC केस सिस्टम मिलाए गए। यह राष्ट्रीय आयोग और सभी 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में चलता है: OTP से पंजीकरण, कहीं से भी शिकायत, ऑनलाइन शुल्क और केस ट्रैकिंग। पुराने e-Daakhil केस स्थानांतरित कर दिए गए। आयोग के काउंटर पर काग़ज़ी शिकायत भी अब भी मान्य है।

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कौन सा उपभोक्ता आयोग?

यह आपके द्वारा चुकाई गई वस्तु या सेवा की क़ीमत पर निर्भर है (उपभोक्ता संरक्षण (क्षेत्राधिकार) नियम, 2021): ज़िला आयोग — ₹50 लाख तक; राज्य आयोग — ₹50 लाख से ऊपर ₹2 करोड़ तक; राष्ट्रीय आयोग — ₹2 करोड़ से ऊपर। शिकायत वहाँ कर सकते हैं जहाँ विरोधी पक्ष रहता या काम करता है, जहाँ वाद-कारण उत्पन्न हुआ, या जहाँ आप रहते या काम करते हैं (उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 34(2))।

शुल्क और समय-सीमा

जहाँ चुकाई गई राशि ₹5 लाख तक है वहाँ कोई शुल्क नहीं; उससे ऊपर मामूली स्लैब शुल्क लगता है और पोर्टल सही राशि दिखाता है। वाद-कारण उत्पन्न होने से 2 साल के भीतर शिकायत करनी होती है (धारा 69); देर होने पर पर्याप्त कारण के साथ विलंब माफ़ी का आवेदन चाहिए।

e-Jagriti पर चरण

1) OTP से पंजीकरण और लॉग-इन। 2) नई शिकायत चुनें, फिर आयोग, राज्य और ज़िला चुनें। 3) अपना और विरोधी पक्ष का विवरण डालें (कंपनी के पंजीकृत कार्यालय का पता)। 4) तथ्य तारीखवार, दोष या सेवा में कमी, और राहत — रिफ़ंड, बदलाव, मरम्मत, मुआवज़ा और ख़र्च, राशि सहित — लिखें। 5) शिकायत, सहायक शपथपत्र, सूची (इंडेक्स) और दस्तावेज़ (बिल, वारंटी, ईमेल/चैट, फ़ोटो, जॉब कार्ड) अपलोड करें। 6) शुल्क हो तो भरें और सबमिट करें। 7) केस नंबर और सुनवाई की तारीखें ट्रैक करें; कुछ सुनवाई वीडियो से होती हैं।

आयोग क्या आदेश दे सकता है

व्यापारी या सेवा प्रदाता को दोष दूर करने, सामान बदलने, क़ीमत लौटाने, मुआवज़ा और ख़र्च देने, या अनुचित व्यापार व्यवहार बंद करने का आदेश (धारा 39)। अधिनियम का लक्ष्य 21 दिन में स्वीकार्यता तय करना और 3 महीने में (लैब जाँच हो तो 5 महीने में) शिकायत निपटाना है, हालाँकि असल में अक्सर ज़्यादा समय लगता है।

क्या वकील ज़रूरी है?

नहीं — उपभोक्ता अपनी शिकायत खुद दाखिल कर बहस कर सकते हैं। जटिल या बड़ी राशि वाले मामलों में कई लोग ड्राफ्टिंग और सबूत के लिए अधिवक्ता की मदद लेते हैं।

अधिवक्ता (Adhiwakta) कैसे मदद कर सकता है

अधिवक्ता सुविधा मंच है, लॉ फर्म नहीं; हम केस दाखिल नहीं करते और किसी रिफ़ंड या आदेश की गारंटी नहीं देते। स्वतंत्र अधिवक्ता से सामान्य मार्गदर्शन के लिए ‘अधिवक्ता से पूछें’ (उपभोक्ता) का उपयोग करें, या हमारे कानूनी नोटिस जनरेटर से नोटिस का ड्राफ्ट बनाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या e-Daakhil अब भी चलता है?
1 जनवरी 2025 को e-Daakhil को e-Jagriti में मिला दिया गया। नई उपभोक्ता शिकायतें e-Jagriti पर ऑनलाइन दाखिल होती हैं।
उपभोक्ता शिकायत की समय-सीमा क्या है?
वाद-कारण से 2 साल (उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 69)। देर होने पर विलंब माफ़ी का आवेदन।

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